सुनो
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बुरी बात होती धोखा,
कुछ लोग देखते मौका।
जगत में आये सोच ले,
वरन करो किसने रोका।।
मुलाकात
विधा- कविता
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मिलते किसी मोड़ पर
बन जाती है एक बात
दो दिलों की दास्तान
कहलाती है मुलाकात।
कैदी को भी वक्त मिले
करने को बस दो बात,
रो-रो गुजरती है कभी
सुंदर सुहानी एक रात।
अजनबी से हो मुलाकात
दिल में एक घबराहट हो,
कभी-कभी मन करता है
दर्द मिला है आओ ले सो।
पति-पत्नी की हो मुलाकात
खिल सकता है कोई गुल
सुनहरी बातें चलती रहती
दिल फिर भी नहीं हो फुल।
कभी-कभी मन करता रहे
मुलाकात अभी अधूरी है
मिलते रहते किसी मोड़ पर
तब मुलाकात होती पूरी है।।
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*होशियार सिंह यादव
गुलशन/उद्यान/बाग
विधा- कविता
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मन प्रसन्न होता है
जहां लगे हो बाग,
पेड़ ना काटे कोई
अलाप रहे हैं राग।
बाग जहां लगे हो
आती बसंत बहार,
तितली भंवरे,जन
करते उनसे प्यार।
गुलशन जब उजड़े
रूठ जाती है बहार,
लोग पास ना आते
कर ले लाख पुकार।
मन हर्षित करते हैं
फूल कली मुसकाय,
पेड़ कभी ना काटो
आओ उद्यान लगाये।
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*होशियार सिंह यादव
चंद्र
अंबर पर तारे खिले, सर्द सुहानी रात।
चंद्र किरण रोशन करे, जैसे हो बारात।।
शरीर
धर्म-कर्म करते रहो, सुंदर मिला शरीर।
हो जाये जीवन सफल, मिटे जगत की पीर।।



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