Tuesday, March 31, 2020

 चूल्हा नौत
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दूसरे प्रदेशों से आए श्रमिकों को खाना खिलाया जा रहा था। खाना खिलाते खिलाते आज चार दिन बीत गए थे। श्रमिकों के लिए गर्मागर्म पूड़ी, हलवा, दाल, सब्जी, कढ़ी और न जाने क्या क्या दिए जा रह थे। सुबह से शाम तक चूल्हा चलता रहता था। अभी खाना खिलाया जा रहा था कि एक परिवार के आठ सदस्य जिसमें बच्चों के हाथ पकड़े महिलाएं खाना खाने के लिए आई तो पास खड़े एक सज्जन से मुंह से निकला-वाह, सरकार ने चूल्हा नौत सभी श्रमिकों को खाने का न्यौता दिया है। कोरोना बीमारी का काज किया जा रहा है। सुनकर ठहाका लगाया। सभी मौन एकटक देखते रह गए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा***

          रोटी 

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रोटी खातिर  हाथ ओटे
कैसा यह देश हमारा है
पैसे के लिए  प्राण दे दे
पैसा लगे अति प्यारा है,
मेहनत से जो जी चुराते
भूखों प्यासे  वो मरते हैं
कठोर परिश्रम करते रहे
वो जग के कष्ट हरते हैं,
मुफ्त का  खाने बढ़ गए
दिनभर चाहे मुफ्त माल
दुनिया में धोखा देते जो
वो बजाते हैं व्यर्थ गाल,
लो मेहनत  फर्ज बनाए
नाम कमाएंगे  फिर सारे
देखना एक दिन आएगा
लक्ष्मी पहुंचे अपने द्वारे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना, हरियाणा** 

ताई ताऊ संवाद 

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ताई बोली ताऊ से......
क्या मौज हुई श्रमिकों की
बारातियों जैसी हो खातिर
कुछ लफंगे खाना खा जाते
रखते  दिमाग अति शातिर।
ताऊ बोला ताई से..........
बड़ी मुसीबत आई देश में
फूंक फूंक रख  रहे कदम
एक बार कोरोना  छू जाए
न जाने कब निकलेगा दम,
पूरा देश जुटा  हुआ  अब
दे रहा दान  दक्षिणा अपार
खाना खाए गरीब के बच्चे
जन जन का यह है आभार।
**होशियार सिंह,लेखक,कनीना,हरियाणा**


      दूरी 

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दूरी बढ़ी जन जन में
ऐसी कोरोना बीमारी
बहुत कष्ट दे डाले है
दुनिया मौन हुई सारी,
कभी कभी डर लागे
कब तक ये सताएगा
कितने लोगों ले जान
कब भारत से जाएगा,
सोच सोच परेशान हैं
भारत की व्यथा भारी
करोड़ों का नुकसान है
दर्द में बच्चे, नर-नारी,
आओ देश से भगा दे
मिलके सारे देशवासी
घरों में छुपकर रहना
बनकर सारे मृदुभाषी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**






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