बरखा
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हो रही बरसात है
बरस रहा है पानी
तरुवर लहलहाते
ज्यों आई जवानी,
पक्षी पेड़ों में छुपे
वन में बैठे हाथी
घोर अंधेरा छाया
बादल लगते नाती,
जल भरा खेतों में
टर्राते जल में भेक
अच्छी फसल हो
मन में इरादे नेक,
भीग रहा दामन है
भीग रहे हैं बच्चे
हंसी खुशी झलके
वो हैं मन के सच्चे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
मेले ही मेले
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कहीं बाबा का मेला
कहीं खाटू पुकारता
मेलों से बड़ा लगाव
देख देख नहीं हारता,
निशान लेकर जा रहे
ले जाते शक्कर प्रसाद
मन में मन्नत लिए है
दिल में बाबा है याद,
कोई मन मेें प्रसन्न है
कोई घर से हो दुखी
ऐसी बाबा कृपा हो
हो जाते सभी सुखी,
मेले दे जाते प्रसन्नता
भर जाते मन उल्लास
खुशी
मनाते जा रहे
जब तक तन में सांस।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से......
घुड़दौड़ और ऊंट दौड़ ने
कर दिया मन को हर्षित
बाबा धूना सजा हुआ है
कर दिया जन आकर्षित।
ताऊ बोला ताई से.......
शक्कर का प्रसाद चढ़ाते
हजारों भक्तजन निराले
दूर दराज से आए कई
भक्तजन कई भोलेभाले,
लंबी लंबी कतार लगी
इंतजार करते नर नारी
दूर दराज से भक्त आते
खत्म हो विपत्तियां सारी,
जगह जगह भंडारे लगे
सजा हुआ बाबा दरबार
बारिश कष्ट दे देती सदा
मजा किरकिरा हर बार।
**होाियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
**
भक्ति
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जमकर बादल बरसे और संत शिरोमणि के मेले में पेट के बल जाना बहुत कठिन था। एक औरत होकर भी हिम्मत नहीं हारी। रास्तों में दो दो फीट पानी में से चलकर वो सीधी बाबा के धाम पर पहुंची और बाबा के धूने पर जाकर धोक लगाई। सचमुच ऐसा लगा जैसे बाबा की असीम कृपा उनके सिर पर है। वो महिला अब मुस्कुरा रही थी। उसको देखकर मन श्रद्धा एवं भक्ति से भर गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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हो रही बरसात है
बरस रहा है पानी
तरुवर लहलहाते
ज्यों आई जवानी,
पक्षी पेड़ों में छुपे
वन में बैठे हाथी
घोर अंधेरा छाया
बादल लगते नाती,
जल भरा खेतों में
टर्राते जल में भेक
अच्छी फसल हो
मन में इरादे नेक,
भीग रहा दामन है
भीग रहे हैं बच्चे
हंसी खुशी झलके
वो हैं मन के सच्चे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
मेले ही मेले
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कहीं बाबा का मेला
कहीं खाटू पुकारता
मेलों से बड़ा लगाव
देख देख नहीं हारता,
निशान लेकर जा रहे
ले जाते शक्कर प्रसाद
मन में मन्नत लिए है
दिल में बाबा है याद,
कोई मन मेें प्रसन्न है
कोई घर से हो दुखी
ऐसी बाबा कृपा हो
हो जाते सभी सुखी,
मेले दे जाते प्रसन्नता
भर जाते मन उल्लास
खुशी
मनाते जा रहे
जब तक तन में सांस।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से......
घुड़दौड़ और ऊंट दौड़ ने
कर दिया मन को हर्षित
बाबा धूना सजा हुआ है
कर दिया जन आकर्षित।
ताऊ बोला ताई से.......
शक्कर का प्रसाद चढ़ाते
हजारों भक्तजन निराले
दूर दराज से आए कई
भक्तजन कई भोलेभाले,
लंबी लंबी कतार लगी
इंतजार करते नर नारी
दूर दराज से भक्त आते
खत्म हो विपत्तियां सारी,
जगह जगह भंडारे लगे
सजा हुआ बाबा दरबार
बारिश कष्ट दे देती सदा
मजा किरकिरा हर बार।
**होाियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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भक्ति
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जमकर बादल बरसे और संत शिरोमणि के मेले में पेट के बल जाना बहुत कठिन था। एक औरत होकर भी हिम्मत नहीं हारी। रास्तों में दो दो फीट पानी में से चलकर वो सीधी बाबा के धाम पर पहुंची और बाबा के धूने पर जाकर धोक लगाई। सचमुच ऐसा लगा जैसे बाबा की असीम कृपा उनके सिर पर है। वो महिला अब मुस्कुरा रही थी। उसको देखकर मन श्रद्धा एवं भक्ति से भर गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**







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