खेतों में
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परीक्षा अब पूरी हुई
बच्चे चले खेत ओर
कभी आंधी, वर्षा तो
कभी गरजे बदरा घोर,
हाथ बटाते खेतों में
मदद करे मां बाप की
कभी चिडिय़ा बोलती
फुफकार सुने सांप की,
पेड़ों की छांव है प्यारी
निखरे धरा छवि न्यारी
मेहनत से जी न चुराए
यही कहावत है हमारी,
प्रभु भी मदद करते हैं
जो डरते नहीं तूफान से
जीना जिसने सीखा हैं
वो जीते हैं बड़ी शान से।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
लावणी
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सरसों की लावणी आई
दौड़ चले किसान सारे
ओलावृष्टि ने मारा कुछ
सोना उपजेंगे खेत हमारे,
कभी चने की खेती थी
अब होती खेती गेहूं की
सरसों उगाकर लाभ ले
फिर देख बाट बटेऊं की,
कपास,बाजरा और ग्वार
लहलहाते जब खेतों में
मन अंगड़ाई लेकर उठे
जब सोना उपजे रेतों में,
जल्दी से पैदावार ले रहे
डर लगे आंधी, बरसात
ईमानदारी से काम करते
ईश्वर देता सदा ही साथ।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से....
मैं खाना लेकर आऊंगी
तुम खेत में करो लावणी
बेच फसल ला दो साड़ी
मन को लगती लुभावनी।
ताऊ बोला ताई से.......
रोटी, चटनी छाछ लाना
मिलके खाएं दोनों खाना
थोड़ी शक्कर,घी ले आना
शाम ढुले तो फिर जाना,
भाग भाग करूं लावणी
पैदावार जल्दी निकालेंगे
ओलावृष्टि अगर आए
निज पैदावार बचा लेंगे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
लावणी
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अपना पेट पालने के लिए रामू अपनी मां के साथ खेतों में लावणी का काम करने जाता। शाम को लौटकर अपनी मां का खाना बनाने में मदद करता। उसकी मां ने एक दिन कहा-बेटा, घर पर खाना आदि बनाने के लिए एम सुंदर सी बहु की आवश्यकता है। रामू ने अश्रुपूरित नेत्रों से कहा-पहले मां लावणी का काम पूरा कर लेते हैं। कुछ पैसे इकटठा कर लेते हैं ताकि विवाह शादि में काम आएंगे। मां ने कहा-तो ठीक है बेटा, कल से और अधिक मेहनत कर अधिक पैसे कमाएंगे। आज रामू को याद आया कि मां के लिए एक बहु की जरूरत होती है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**






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