आपदाएं
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कभी कभी आए आपदा
कर देती है भारी विनाश
दर्द से कराह उठते जीव
दूभर होता लेना भी सांस,
कुछ मानव के हो दुश्मन
करते रहते उल्टे ही काम
खुद तो मरना वो चाहते है
औरों को कर देते बदनाम,
ऐसा जैव हथियार बनाया
करते अपने घातक प्रयोग
पूरा विश्व चपेट में आया है
फैलता जा रहा घातक रोग,
यूं ही इन हथियारों में ही
बीत जाएगी कितनी ऐसे
हो सके कष्ट उठा औरों का
कर ले कर ले कोई बंदगी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
कोरोना की पड़ी मार
सारी सृष्टि गई है हार
देश की सेवा करूंगी
मुझे भारत से है प्यार।
ताऊ बोला ताई से......
22 मार्च को है कर्फ्यू
ट्रेन, बस सेवाएं हैं बंद
घर में रहकर सेवा कर
सेंसेक्स भी पड़ा है मंद,
बुरा वक्त कठिन परीक्षा
सहमें हुए सब ही जन
प्रकृति प्रकोप दिखाती
सोच सोच दुखी है मन।
**होाियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
कोरोनावायरस
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उसे कोरोनावायरस नहीं अपनी फसलों की चिंता खाए जा रही थी। ओले एवं बारिश ने जहां फसल को नष्ट किया था तो अब फिर मौसम बदल रहा था। उस पर अब कोरोनावायरस का जोर था। चारों ओर शोर मचा था और अपने को बचाने के प्रयास कर रहे थे किंतु गरीब किसान को कोरोनावायरस से अधिक ओले और बारिश की मार दिखाई पड़ रही थी। वो भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि उस आपदाओं से बचाया जाए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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कभी कभी आए आपदा
कर देती है भारी विनाश
दर्द से कराह उठते जीव
दूभर होता लेना भी सांस,
कुछ मानव के हो दुश्मन
करते रहते उल्टे ही काम
खुद तो मरना वो चाहते है
औरों को कर देते बदनाम,
ऐसा जैव हथियार बनाया
करते अपने घातक प्रयोग
पूरा विश्व चपेट में आया है
फैलता जा रहा घातक रोग,
यूं ही इन हथियारों में ही
बीत जाएगी कितनी ऐसे
हो सके कष्ट उठा औरों का
कर ले कर ले कोई बंदगी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
कोरोना की पड़ी मार
सारी सृष्टि गई है हार
देश की सेवा करूंगी
मुझे भारत से है प्यार।
ताऊ बोला ताई से......
22 मार्च को है कर्फ्यू
ट्रेन, बस सेवाएं हैं बंद
घर में रहकर सेवा कर
सेंसेक्स भी पड़ा है मंद,
बुरा वक्त कठिन परीक्षा
सहमें हुए सब ही जन
प्रकृति प्रकोप दिखाती
सोच सोच दुखी है मन।
**होाियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
कोरोनावायरस
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उसे कोरोनावायरस नहीं अपनी फसलों की चिंता खाए जा रही थी। ओले एवं बारिश ने जहां फसल को नष्ट किया था तो अब फिर मौसम बदल रहा था। उस पर अब कोरोनावायरस का जोर था। चारों ओर शोर मचा था और अपने को बचाने के प्रयास कर रहे थे किंतु गरीब किसान को कोरोनावायरस से अधिक ओले और बारिश की मार दिखाई पड़ रही थी। वो भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि उस आपदाओं से बचाया जाए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




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