बचाया
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होली का पर्व मनाया
घर में पकवान बनाया
प्राकृतिक रंग डालकर
जमकर पकवान खाया,
बैर भाव वर्षों से चला
रंग डाल उसे भुलाया
पेड़ ना काटे शपथ ली
पर्यावरण हमने बचाया,
पानी की कद्र समझाई
पेड़ों की महानता बताई
जब जीवन बच जाएगा
नहीं होगी जग में हंसाई,
होली का पर्व फिर आए
यूं ही देके जाए खुशियां
हरो ईश्वर कष्ट जन के
न रहे कोई जन दुखिया।
**होाियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
हर्षाया
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खुशियां लेकर पर्व आया
तन मन भीगा मन हर्षाया
डाला गुलाल चेहरों पर
नव यौवन उभरकर आया,
बच्चे,बूढ़े और जवान सब
रंग गुलाल में डूब गए हैं
ऐसा रंगों में रंग डाला है
लगे सब चेहरे नए नए हैं,
गांव गांव में मेले लग रहे
चहुं ओर मचा हुआ शोर
फसल पकी हर्षाते किसान
नभ में बादल मंडराते घोर,
खूब पकवान बनाकर खाते
हलवा,पूरी,पकौड़े, दहीबड़े
बच्चों में नया उत्साह जागा
रंग गुलाल लगे लाल, हरे।
**होाियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताई ताऊ संवाद
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ताई बोली ताऊ से......
खूब रंग गुलाल मला
अब हम बने हैं भूत
होली की खुशी होती
लुटी जाए सो ले लूट।
ताऊ बोला ताई से.....
हंसी खुशी बीती होली
रंगीन पकवान बनाएंगे
कुछ गरीबों में बांटकर
मजे से मिलकर खाएंगे,
एक वर्ष पर गया पर्व
अगले वर्ष फिर आएगा
खुशियों से भर गया हमें
फिर नया सवेरा लाएगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
अहसास
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लंबे समय से आपस में अनबन चली आ रही थी किंतु होली के दिन रामू रंग गुलाल लेकर रमन के घर आ धमका और रमन को खूब रंग में रंग दिया और हंसी खुशी में गले मिलकर कहा-देखो, जीवन क्षण भंगुर होता है। अगर हम दुश्मनी निभाएंगे तो भावी पीढ़ी हमें घृणा की नजर से देखेगी। आओ हम दुश्मनी को भुला दे। आज रमन को अपनी गलती का अहसास हुआ और गले मिलकर मन साफ कर लिया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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होली का पर्व मनाया
घर में पकवान बनाया
प्राकृतिक रंग डालकर
जमकर पकवान खाया,
बैर भाव वर्षों से चला
रंग डाल उसे भुलाया
पेड़ ना काटे शपथ ली
पर्यावरण हमने बचाया,
पानी की कद्र समझाई
पेड़ों की महानता बताई
जब जीवन बच जाएगा
नहीं होगी जग में हंसाई,
होली का पर्व फिर आए
यूं ही देके जाए खुशियां
हरो ईश्वर कष्ट जन के
न रहे कोई जन दुखिया।
**होाियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
हर्षाया
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खुशियां लेकर पर्व आया
तन मन भीगा मन हर्षाया
डाला गुलाल चेहरों पर
नव यौवन उभरकर आया,
बच्चे,बूढ़े और जवान सब
रंग गुलाल में डूब गए हैं
ऐसा रंगों में रंग डाला है
लगे सब चेहरे नए नए हैं,
गांव गांव में मेले लग रहे
चहुं ओर मचा हुआ शोर
फसल पकी हर्षाते किसान
नभ में बादल मंडराते घोर,
खूब पकवान बनाकर खाते
हलवा,पूरी,पकौड़े, दहीबड़े
बच्चों में नया उत्साह जागा
रंग गुलाल लगे लाल, हरे।
**होाियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताई ताऊ संवाद
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ताई बोली ताऊ से......
खूब रंग गुलाल मला
अब हम बने हैं भूत
होली की खुशी होती
लुटी जाए सो ले लूट।
ताऊ बोला ताई से.....
हंसी खुशी बीती होली
रंगीन पकवान बनाएंगे
कुछ गरीबों में बांटकर
मजे से मिलकर खाएंगे,
एक वर्ष पर गया पर्व
अगले वर्ष फिर आएगा
खुशियों से भर गया हमें
फिर नया सवेरा लाएगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
अहसास
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लंबे समय से आपस में अनबन चली आ रही थी किंतु होली के दिन रामू रंग गुलाल लेकर रमन के घर आ धमका और रमन को खूब रंग में रंग दिया और हंसी खुशी में गले मिलकर कहा-देखो, जीवन क्षण भंगुर होता है। अगर हम दुश्मनी निभाएंगे तो भावी पीढ़ी हमें घृणा की नजर से देखेगी। आओ हम दुश्मनी को भुला दे। आज रमन को अपनी गलती का अहसास हुआ और गले मिलकर मन साफ कर लिया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**













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