मास्क
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मास्क हो गए हैं महंगे
सेनिटाइजर भाव बढ़े
कोरोना का दंश बढ़ा
मृतकों की संख्या चढ़े,
सेंसेक्स गिर गया अब
कारोबार घटता जाए
दुश्मन की ऐसी चाल
जो जगत को रुलाए,
पेपर रद्द, बैठक रद्द है
रद्द हो चुके है सिनेमा
बचाव के तरीके ढूंढते
रिस्क बढ़े अब बीमा,
एक दिन सुबह आए
लेकर के प्रकाश नया
दुख की घडिय़ां बीतेंगी
सुख का करेंगी वो बयां।
**होशियार सिंह, लेखक, कनीना, हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.......
कोरोना का कोहराम मचा
कोई देश नहीं बच पाया
चीन से शुरू हुआ था जो
पूरी जग को जिसे रुलाया।
ताऊ बोला ताई से........
बच्चे,युवा और बुजुर्ग जन
हताश और बड़े परेशान हैं
दिन रात मैदान में जुटा है
देश सब देशों में महान है,
ढूंढ लेेंगे कोरोना की दवा
कोरोना राक्षस मारा जाएगा
दुनियां से बेशक बच जाए
भारत से नहीं बच पाएगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
मार
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रामू एक जोहड़ के किनारे बैठा परेशान मुद्रा में लहरों को निहार रहा था। ऊंची लहर उठती और वो किनारे के एक पत्थर से टकराकर वापस आ रही थी। बार बार टक्कर मारकर आखिरकार पानी में वो पत्थर की शिला गिर गई। रामू को अपने जीवन की याद आ गई कि बार बार बार उसके जीवन में गमों की तरंगें उठती रही और उसे कमजोर करके गिरा दिया। इंसान एवं ऊंची लहरों की गति एक समान नजर आई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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मास्क हो गए हैं महंगे
सेनिटाइजर भाव बढ़े
कोरोना का दंश बढ़ा
मृतकों की संख्या चढ़े,
सेंसेक्स गिर गया अब
कारोबार घटता जाए
दुश्मन की ऐसी चाल
जो जगत को रुलाए,
पेपर रद्द, बैठक रद्द है
रद्द हो चुके है सिनेमा
बचाव के तरीके ढूंढते
रिस्क बढ़े अब बीमा,
एक दिन सुबह आए
लेकर के प्रकाश नया
दुख की घडिय़ां बीतेंगी
सुख का करेंगी वो बयां।
**होशियार सिंह, लेखक, कनीना, हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.......
कोरोना का कोहराम मचा
कोई देश नहीं बच पाया
चीन से शुरू हुआ था जो
पूरी जग को जिसे रुलाया।
ताऊ बोला ताई से........
बच्चे,युवा और बुजुर्ग जन
हताश और बड़े परेशान हैं
दिन रात मैदान में जुटा है
देश सब देशों में महान है,
ढूंढ लेेंगे कोरोना की दवा
कोरोना राक्षस मारा जाएगा
दुनियां से बेशक बच जाए
भारत से नहीं बच पाएगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
मार
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रामू एक जोहड़ के किनारे बैठा परेशान मुद्रा में लहरों को निहार रहा था। ऊंची लहर उठती और वो किनारे के एक पत्थर से टकराकर वापस आ रही थी। बार बार टक्कर मारकर आखिरकार पानी में वो पत्थर की शिला गिर गई। रामू को अपने जीवन की याद आ गई कि बार बार बार उसके जीवन में गमों की तरंगें उठती रही और उसे कमजोर करके गिरा दिया। इंसान एवं ऊंची लहरों की गति एक समान नजर आई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


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