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अपस्मार या मिर्गी कहो
या फिर कहो एपिलेप्सी
तंत्रिका संबंधित रोग है
बातें करे वो बहकी सी
अनुवंशिकी रोग नहीं है
खो देता है मानव चेतना
बेहोश, वो झाग गिराता
पाया अभी तक भेद ना,
सबसे पुराना रोग होता
दौरा चले दो तीन मिनट
सर्जरी से कुछ इलाज है
फैली है बीमारी घट घट,
व्रत, उपवास नहीं करो
कह दो मिर्गी वालों से
कोई भी पीडि़त हो जाए
यह ज्ञात हुआ सालों से।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताई ताऊ संवाद
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ताई बोली ताऊ से....
लॉकडाउन चल रहा है
घर से निकलना कठिन
खेत में लो करे लावणी
बीत जाए पूरा ही दिन।
ताऊ बोला ताई से........
दरांती,रोटी साथ ले लो
बोतल भर लो पानी की
एक डोली छाछ भर लो
थैली भर लो धाणी की,
सरसों की करेंगे लावणी
पानी व छाछ हम पीएंगे
मेहनत करके खेतों में यूं
मजे से ये जीवन जीएंगे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना, हरियाणा**
थप्पड़
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कारोना का भय सता रहा था कि एक फल बेचने वाला जवान जब फल बेच रहा था तो उसने मास्क नहीं पहनी। तभी उधर से गुजर रहे अधिकारी के सिक्योरिटी गार्ड की नजर पड़ी। गाड़ी से उतरकर वो सीधा जवान तक आया और उसे एक जोर का थप्पड़ जड़ दिया। तब उसे समझाते हुए कहा-कि कम से कम स्वयं तो मरो किंतु दूसरों को न मारो। हाथों में दस्ताने एवं मुख पर मास्क जरूर पहनो। समय समय पर हाथों को धोते रहो। युवक एक टक कभी रोटी रोजी को देखता तो कभी उस सिक्योरिटी गार्ड को पर कहते हैं कि सामर्थ को नहीं दोष गुसाई। बेचारा अपने मुंह को सहलाता रहा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
नवरात्रे
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घर में बंद इंसान आज
मना रहा विक्रमी संवत
नवरात्रे घर में मना रहा
कोरोना ने कर दी गत,
फैल रहा रोग एकाएक
दुनिया आ गई चपेट में
कइयों का रोजगार गया
रोटी नहीं मिले पेट में,
जीवों का जो खून पीते
खाते चूहे व चमगादड़
कोरोना का रोग फैलता
दिल करता है धड़धड़,
मर रहे कितने ही जन
घर में बंद कितने जन
मृत्युशैया पर बैठे बहुत
रो रहे हैं वे मन ही मन।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**






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