नकली
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नकल बनाए नकली
बुद्धि बनाती असली
ज्यों बिना घिरनी की
कहलाती है चकली,
नकल हो थोथा चना
सारहीन कहलाता है
चले बुद्धि की हवा
नभ में उड़ जाता है,
मां बाप के संस्कार
साथ निभाते जाते हैं
कु-संस्कार मानव के
बुजदिल जन बनाते हैं,
नकल छोड़ देना आज
बुद्धि से कर लो काम
एक दिन नाम कमाना
मिले जरूर सुंदर धाम।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
बढ़ी नकल
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अकल की बात कम
बढ़ती जा रही नकल
इंसान कहलाते जरूर
पशु समान हुई अक्ल,
लिखना पढऩा भूले हैं
मारते रहते बैठे सीटी
ट्रेन स्टेशन से निकली
बैठे रह गए ज्यों टीटी,
मां,बाप,भाई,बहन ही
नकल कराने जाते हैं
कैसे बच्चे महान बनेंगे
बिना कर्म फल पाते हैं,
कब सुधरेगा ये समाज
कब हो अकल प्रयोग
नकल विष की बेल है
यह कैंसर सा हो रोग।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
नकल की प्रवृति बढ़ी
अब खो गई है अकल
बेटा परीक्षा देने जाता
बापू करवाता है नकल।
ताऊ बोला ताई से.......
कुछ नकल की आड़ में
लड़कियों पर डालते डोरे
पढऩा लिखना नहीं जाने
लोफर,लफंगे हो गए छोरे,
लठ दिखा करते हैं नकल
परीक्षक को देते हैं गाली
बापू नृत्य करते देखे गए
बेटे खूब बजाते हैं ताली।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
सजा
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अधिकारी मौके पर परीक्षा केंद्र पहुंचा। देखकर दंग रह गया। छतों पर तथा आस पास भारी संख्या में लोग नकल कराने में व्यस्त थे। अधिकारी को भी नकल कराने वालों ने गाली दे डाली फिर क्या था पर्चा रद करके सेंटर ही स्थानांतरित हो गया। अब तो हांफते हुए सभी बच्चे दूर परीक्षा देने के लिए जान लगे। रामू गरीब एवं इमानदार विद्यार्थी को बड़ा दर्द हुआ। घर की घर परीक्षा देता था अब किराया लगाकर परीक्षा देने को जाना पड़ा। उसे बड़ी सजा मिली।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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नकल बनाए नकली
बुद्धि बनाती असली
ज्यों बिना घिरनी की
कहलाती है चकली,
नकल हो थोथा चना
सारहीन कहलाता है
चले बुद्धि की हवा
नभ में उड़ जाता है,
मां बाप के संस्कार
साथ निभाते जाते हैं
कु-संस्कार मानव के
बुजदिल जन बनाते हैं,
नकल छोड़ देना आज
बुद्धि से कर लो काम
एक दिन नाम कमाना
मिले जरूर सुंदर धाम।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
बढ़ी नकल
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अकल की बात कम
बढ़ती जा रही नकल
इंसान कहलाते जरूर
पशु समान हुई अक्ल,
लिखना पढऩा भूले हैं
मारते रहते बैठे सीटी
ट्रेन स्टेशन से निकली
बैठे रह गए ज्यों टीटी,
मां,बाप,भाई,बहन ही
नकल कराने जाते हैं
कैसे बच्चे महान बनेंगे
बिना कर्म फल पाते हैं,
कब सुधरेगा ये समाज
कब हो अकल प्रयोग
नकल विष की बेल है
यह कैंसर सा हो रोग।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
नकल की प्रवृति बढ़ी
अब खो गई है अकल
बेटा परीक्षा देने जाता
बापू करवाता है नकल।
ताऊ बोला ताई से.......
कुछ नकल की आड़ में
लड़कियों पर डालते डोरे
पढऩा लिखना नहीं जाने
लोफर,लफंगे हो गए छोरे,
लठ दिखा करते हैं नकल
परीक्षक को देते हैं गाली
बापू नृत्य करते देखे गए
बेटे खूब बजाते हैं ताली।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
सजा
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अधिकारी मौके पर परीक्षा केंद्र पहुंचा। देखकर दंग रह गया। छतों पर तथा आस पास भारी संख्या में लोग नकल कराने में व्यस्त थे। अधिकारी को भी नकल कराने वालों ने गाली दे डाली फिर क्या था पर्चा रद करके सेंटर ही स्थानांतरित हो गया। अब तो हांफते हुए सभी बच्चे दूर परीक्षा देने के लिए जान लगे। रामू गरीब एवं इमानदार विद्यार्थी को बड़ा दर्द हुआ। घर की घर परीक्षा देता था अब किराया लगाकर परीक्षा देने को जाना पड़ा। उसे बड़ी सजा मिली।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


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