Sunday, March 29, 2020

सपना 
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आता रहता एक सपना
जग में ना  कोई अपना
एक पते की बात कहीं
राम नाम सदा ही रटना,
शांत  बैठकर अपने घर
हाथ जोड़ नमन कर लो
फैला है वायरस  खतरा
अपनों के  लिए डर लो,
कभी एकांत रहके  मिले
आंतरिक शक्ति  व शांति
खुराफात मन  की उपज
पल में कर बैठते  क्रांति,
लो आज विश्वास जगाए
याद में उनके दिये जलाए
रो रहे कितने जन जग में
बस एक बार उन्हें हंसाए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




जैव युद्ध 

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मलयुद्ध भूले भूले तीर
घटते जा रहे है शूरवीर
परमाणु से लड़ाई होती
जैव युद्ध ने बढ़ाई पीर,
कहीं  नक्सली  घात है
कहीं डर है आतंकवाद
कहीं भाई  भाई दुश्मन
कहीं छेड़ रहे है जेहाद,
जनसंख्या बढ़ती  जाए
डार्विन आता बड़ा याद
रोटी,भोजन और जमीन
कहाए झगड़े की फसाद,
रोग,रोगाणु और विषाणु
कब तक लेंगे जन जान
शांति से रहना नहीं चाहे
राक्षसों की यही पहचान।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा** 


ताई ताऊ संवाद

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ताई बोली ताऊ से.....
देश हुआ  है लॉकडाउन
एक ओर कोरोना का डर
अपने वतन पैदल जा रहे
दूर बहुत हैं  श्रमिक  घर।
ताऊ बोला ताई से.........
दौड़ चला यूपी  व बिहार
मध्यप्रदेश और राजस्थान
पूरा परिवार चला जा रहा
हिम्मत है कदमों  में जान,
कोई नहीं कोरोना की मौत
हरियाणा मेरा हरि का घर
ऐतिहात बरत रहे मिलकर
ऐसे में नहीं कोई हमें डर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**



मानवता 

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सरकार के आदेशानुसार श्रमिकों के लिए खाने का प्रबंध किया गया था जिसमें कोरोनावायरस के डर सेभीड़ जमा न करने का आदेश था। बंद पैकेट खाने के वितरित किए जा रहे थे। लावणी करने वाले लोग लावणी किसी के करते और खाने के पैकेट लने आ जाते। एक ही परिवार के दस दस जन लाइन में खड़े होकर पैकेट ले जाते और जितना खाए जाए खाते शेष को फेंक देते। और तो और शराबियों को घर में खाना न मिलने से वे भी लाइन में आ खड़े होते। प्रतिदिन दो हजार श्रमिक खाने के लिए सुबह और इतने ही शाम को टूट पड़ते। आखिरकार एक अधिकारी ने कहना पड़ा-समाज में मानवता कहां है? हाथ ओटने में आगे और देने में पीछे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


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