कृष्ण अवतारी
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खाटू के बाबा तुम हो
कहाते कृष्ण अवतारी
विश्वभर से भक्त आते
महिमा गाते नर नारी,
शीश के दानी कहलाते
श्रीकृष्ण ने तुझको माना
सर्वश्रेष्ठ योद्धा कहलाते
तीन बाणधारी है जाना,
कलियुग के हो श्रीकृष्ण
भीम के पौत्र कहाते हो
जब कोई भक्त पुकारता
दौड़े दौड़े चले आते हो,
नहीं हुआ नहीं कोई हो
तुमसा बलशाली जग में
हर भक्त के दिल में बसे
बसे हुए तुम रग रग में।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
होली
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रंग गुलाल लेकर के
आए राम और श्याम
डाल दिया पल में ही
लेकर कृष्ण का नाम,
लाल, पीले और नीले
रंग दिए सबके ही तन
खेल रहे पिचकारी से
भीग गए सब तन-मन,
खा रहे जमकर मिठाई
और लगाते कोई दाव
खूब रंगों से रंग डाला
मिटा दिया उनका चाव,
एक वर्ष में आता पर्व
नहीं पता आए ना फिर
छोटी सी जिंदगी होती
ज्यों बादल नहीं स्थिर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताई ताऊ संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
मोलडऩाथ का मेला आया
शक्कर का प्रसाद चढ़ाएंगे
16 शृंगार करके हम सब
धूने पर जा धोक लगाएंगे।
ताऊ बोला ताई से............
ऊंट दौड़, घुड़ दौड़ देखेंगे
और देखने जाए रस्साकशी
मनमोहक बाबा की मूर्त है
वो तो कब से मन में बसी,
साधु संतों के अखाड़े लगेंगे
भंडारों की लगी हो भरमार
सौहार्दपूर्ण वातावरण बनेगा
आरती गाने होशियार तैयार।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ओलावृष्टि
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देखते ही देखते आसमान से ओले पडऩे लगे। धरती सफेद दिखाई देने लगी। अल्प जमीन से गुजर बसर करने वाली रानी से बाबा से प्रार्थना की कि ओलावृष्टि रुक जाएगी तो वो बाबा को निशान अर्पित करेगी। बस फिर क्या था उसकी अरदास सुनते ही ओलावृष्टि रुक गई। रानी ने खुश होकर बाबा को निशान अर्पित किया। उसकी भक्ति की जीत हुई। इसे कहते हैं भक्ति में शक्ति।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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खाटू के बाबा तुम हो
कहाते कृष्ण अवतारी
विश्वभर से भक्त आते
महिमा गाते नर नारी,
शीश के दानी कहलाते
श्रीकृष्ण ने तुझको माना
सर्वश्रेष्ठ योद्धा कहलाते
तीन बाणधारी है जाना,
कलियुग के हो श्रीकृष्ण
भीम के पौत्र कहाते हो
जब कोई भक्त पुकारता
दौड़े दौड़े चले आते हो,
नहीं हुआ नहीं कोई हो
तुमसा बलशाली जग में
हर भक्त के दिल में बसे
बसे हुए तुम रग रग में।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
होली
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रंग गुलाल लेकर के
आए राम और श्याम
डाल दिया पल में ही
लेकर कृष्ण का नाम,
लाल, पीले और नीले
रंग दिए सबके ही तन
खेल रहे पिचकारी से
भीग गए सब तन-मन,
खा रहे जमकर मिठाई
और लगाते कोई दाव
खूब रंगों से रंग डाला
मिटा दिया उनका चाव,
एक वर्ष में आता पर्व
नहीं पता आए ना फिर
छोटी सी जिंदगी होती
ज्यों बादल नहीं स्थिर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताई ताऊ संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
मोलडऩाथ का मेला आया
शक्कर का प्रसाद चढ़ाएंगे
16 शृंगार करके हम सब
धूने पर जा धोक लगाएंगे।
ताऊ बोला ताई से............
ऊंट दौड़, घुड़ दौड़ देखेंगे
और देखने जाए रस्साकशी
मनमोहक बाबा की मूर्त है
वो तो कब से मन में बसी,
साधु संतों के अखाड़े लगेंगे
भंडारों की लगी हो भरमार
सौहार्दपूर्ण वातावरण बनेगा
आरती गाने होशियार तैयार।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ओलावृष्टि
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देखते ही देखते आसमान से ओले पडऩे लगे। धरती सफेद दिखाई देने लगी। अल्प जमीन से गुजर बसर करने वाली रानी से बाबा से प्रार्थना की कि ओलावृष्टि रुक जाएगी तो वो बाबा को निशान अर्पित करेगी। बस फिर क्या था उसकी अरदास सुनते ही ओलावृष्टि रुक गई। रानी ने खुश होकर बाबा को निशान अर्पित किया। उसकी भक्ति की जीत हुई। इसे कहते हैं भक्ति में शक्ति।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**






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