Wednesday, March 11, 2020

खाना 
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बदला खाना जन का
खाता  है फास्ट फूड
कैसी है  मूड महिमा
मुश्किल से  बने मूड,
कुरकुरे,चटपटा खाना
भागदौड़ कर  नहाना
दूध मक्खन ना खाना
उन्हें युवक  ही माना,
घर का खाना जहर है
बाहर का खाना अमृत
दूध दही को दूर फेंक
नहीं पसंद  करते घृत,
खाना, पीना बदला है
बदल गई चाल ढाल
आधुनिक पीढ़ी होती
कर देती कई कमाल।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


परीक्षाएं 

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कहां गई  वो परीक्षा
दिनरात होती मेहनत
रोटी पानी सब  भूल
हो जाती थी बुरी गत,
चिमनी,लालटेन द्वारा
या चांद रोशनी होती
पोथी पढ़  पढ़कर वो
आंखें कर  लेते मोटी,
सुख  सुविधाएं  नहीं
बस लक्ष्य नजर आता
कहीं फेल ना हो जाऊं
यह डर उनको सताता,
अब ना वो  मेहनत है
ना वो रह  गई  पढ़ाई
थोड़ा  बहुत  पढ़ लेते
बहुत होती अब बड़ाई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

ताई ताऊ संवाद 

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ताई बोली ताऊ से.....
फसल लावणी को आई
बादल  धड़का रहे दिल
जब अनाज घर में आए
समझो प्रभु जाते हैं मिल।
ताऊ बोला ताई से.......
सरसों पककर  है  तैयार
जौ,गेहूं पहुंच गए पकान
देख-देख  किसान प्रसन्न
अन्नदाता की  यही  शान,
प्रभु से करेंगे प्रार्थना अब
मौसम को  रखे वो साफ
बारिश, ओले ना बरसाए
2 माह के लिए करे माफ।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**






ममता
मां और उसका जवान पुत्र दोनों दुर्घटना में घायल हो गए और दोनों को ही अस्पताल में भर्ती कराया गया। दोनों ही होश में आए तो मां को अधिक चोट लगी हुई थी फिर भी होश में आते ही मां ने अपने पुत्र से पूछा-बेटा, तुम्हें तो बहुत चोट लगी है। तुम ठीक तो हो ना? पुत्र ने जब अपनी मां की गंभीर हालात देखकर यूं लगा सचमुच मां के साथ ममता होती है जो कभी अलग नहीं हो सकती है। उसकी आंखों में आंसू छलक आए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

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