कोरोना कांवड़
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रास्ते में युवाओं को रोकते हुए समाजसेवी ने कहा-भाइयो, खाने का प्रबंध है। खाना खाकर ही जाना। युवाओं ने कहा-नहीं, नहीं। हमें तो दूर जाना है। 600 किमी दूर अपने गांव को जाना है।
........पर कोई साधन तक नहीं है फिर आप कैसे जाएंगे?
पैदल ही एकमात्र विकल्प बचा है। हम....
बीच में ही रोकते हुए समाजसेवी ने कहा-परंतु इतनी दूरी पैदल कैसे तय करोगे, कई दिन लग जाएंगे?
युवाओं ने रोनी सूरत बनाते हुए कहा-यूं समझेंगे कि कांवड़ लेकर आए हैं? लोग 600 किमी दूर से कांवड़ भी तो लाते हैं। हम शिवरात्रि नहीं कोरोना कांवड़ नाम देंगे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताई ताऊ संवाद
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ताई बोली ताऊ से.........
घरों में छिपकर बैठे हैं
जैसे कोई डाकू आया
कितनों की जान गई है
हंसते जनों को रुलाया।
ताऊ बोला ताई को......
अदृश्य दुश्मन कहलाता
कोरोनावायरस है दुश्मन
कितने ही भयभीत हुए
कितनों के दर्द तन-मन,
करोड़ों रुपये की है हानि
खराब हुआ है संसाधन
यूं ही अगर चलता रहा
खत्म होंगे धरती के जन।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
जागो
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बार बार चेताया है
क्यों सोया है इंसान
कोरोना का आतंक
क्यों घूम रहा जन,
घर में छुुपकर रहो
हांड रहे सड़कों पर
खुद मरना अगर है
होंगे कई बर्बाद घर,
ताश पीटते रहते हो
हुक्के बिना तसल्ली ना
व्यर्थ गाल बजाते हो
घर में होंगे बच्चे मां,
शांत बैठ जाओ अब
कदम नहीं बढ़ाना है
सभी के प्रयासों से
रोग मार भगाना है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
दो साथ
*********************
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देश पुकार रहा अब
अब तो बढ़ाओ हाथ
निज ताकत दिखाओ
कुछ तो बढ़ाओ हाथ,
मानवता यही कहती
गरीबों की सेवा करो
गरीब खून ना पीओ
कुछ प्रभु से भी डरो,
तरस रहे भोजन को
उनको खिलाए खाना
चार दिन जीवन तेरा
जन बुलबुला है माना,
अब कुछ समझ लो
ना समझे वो नर नहीं
गया समय नहीं आए
सत्य बात संत कही।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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रास्ते में युवाओं को रोकते हुए समाजसेवी ने कहा-भाइयो, खाने का प्रबंध है। खाना खाकर ही जाना। युवाओं ने कहा-नहीं, नहीं। हमें तो दूर जाना है। 600 किमी दूर अपने गांव को जाना है।
........पर कोई साधन तक नहीं है फिर आप कैसे जाएंगे?
पैदल ही एकमात्र विकल्प बचा है। हम....
बीच में ही रोकते हुए समाजसेवी ने कहा-परंतु इतनी दूरी पैदल कैसे तय करोगे, कई दिन लग जाएंगे?
युवाओं ने रोनी सूरत बनाते हुए कहा-यूं समझेंगे कि कांवड़ लेकर आए हैं? लोग 600 किमी दूर से कांवड़ भी तो लाते हैं। हम शिवरात्रि नहीं कोरोना कांवड़ नाम देंगे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताई ताऊ संवाद
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ताई बोली ताऊ से.........
घरों में छिपकर बैठे हैं
जैसे कोई डाकू आया
कितनों की जान गई है
हंसते जनों को रुलाया।
ताऊ बोला ताई को......
अदृश्य दुश्मन कहलाता
कोरोनावायरस है दुश्मन
कितने ही भयभीत हुए
कितनों के दर्द तन-मन,
करोड़ों रुपये की है हानि
खराब हुआ है संसाधन
यूं ही अगर चलता रहा
खत्म होंगे धरती के जन।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
जागो
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बार बार चेताया है
क्यों सोया है इंसान
कोरोना का आतंक
क्यों घूम रहा जन,
घर में छुुपकर रहो
हांड रहे सड़कों पर
खुद मरना अगर है
होंगे कई बर्बाद घर,
ताश पीटते रहते हो
हुक्के बिना तसल्ली ना
व्यर्थ गाल बजाते हो
घर में होंगे बच्चे मां,
शांत बैठ जाओ अब
कदम नहीं बढ़ाना है
सभी के प्रयासों से
रोग मार भगाना है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
दो साथ
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देश पुकार रहा अब
अब तो बढ़ाओ हाथ
निज ताकत दिखाओ
कुछ तो बढ़ाओ हाथ,
मानवता यही कहती
गरीबों की सेवा करो
गरीब खून ना पीओ
कुछ प्रभु से भी डरो,
तरस रहे भोजन को
उनको खिलाए खाना
चार दिन जीवन तेरा
जन बुलबुला है माना,
अब कुछ समझ लो
ना समझे वो नर नहीं
गया समय नहीं आए
सत्य बात संत कही।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




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