Monday, March 30, 2020


ठहाका

******************************
***********************************
*****************************************






कोरोनावायरस के चलते श्रमिकों एवं गाडिय़ा लुहारों को समाजसेवी प्रतिदिन खाना खिला रहे थे। रोजाना अदल बदल कर खाना दे रहे थे। आज जब युवक खाना खिलाने गाडिय़ा लुहारों में पहुंचे तो एक लुहारी ने ठेठ हरियाण्वी अंदाज में कहा-अरे ओ जिंगड़ो, सरकार तुमको हमारे खाणा के भारी पैसे दे रही है। तुम हमको कभी म्हारा हिस्से का हलवा तक नहीं खिलाते, फल नहीं लाकर दे रहे। लेकर सब्जी पूड़ी आ खड़े होते हो, खा लो खाना। जाओ हम तुम्हारा घटिया खाणा हीं खावांगे। कल तुम हलवा और पल लेकर आना फिर ही खाएंगे। और हलवा नहीं लाए तो तुम्हार शिकायत भी करणी जाणा सा।
इतना सुनकर खाना खिलाने वालों ने ठहाका लगाया और उनकी पूरे दिन की थकान पल में मिट गई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




 
ताई ताऊ संवाद 
*************************
*******************************
**********************************
ताई बोली ताऊ से.....
मुसीबत का पहाड़ टूटा
कोरोना कहां  से आया
हंसते गाते जा  रहे हम
कोरोना ने खूब रुलाया।
ताऊ बोला ताई से.......
कोरोना एक नया वायरस
दुष्ट दिमाग ने इसे बनाया
मिट्टी में एक दिन मिलेगा
जिसने भी जन को रुलाया,
शांतभाव से घर में बैठे हैं
चौपट हो गया सारा धंधा
सेंसेक्स गिरता ही जा रहा
हर क्षेत्र  में  मंदा ही मंदा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


       पलायन

******************************
*********************************
***************************
भाग चले प्रदेशी लोग
पता नहीं कैसा ये रोग
खाना पीना भूल गए हैं
बायो अस्त्र हो अमोघ,
धैर्य सबसे  बड़ी पूंजी
बस कर लो कुछ जमा
लुट गई यह दौलत तो
सब कुछ देंगे तुम गवां,
सावधानी बरतते रहना
संतों का यही है कहना
चाहे कैसा धन मिलता
निज घरों में ही  रहना,
पुकार रहा परिवार भी
अब मिलकर एक रहो
शांति से घर में बैठकर
कोरोना को टाटा कहो।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

   मदद 

******************
********************************
*************************************
मदद जमकर करते आए
हरियाणा की रित कहाए
यहां से होकर कोई जाए
उसे भूखो  कभी ना पाए,
तन,मन और धन कहाता
हरियाणा की बड़ी  पूंजी
मेहनत से नहीं जी चुराते
यही हो  सफलता कुंजी,
खाना पीना और आवास
देते रहेंगे जब  तक सांस
दूर से चलकर  वो आते
होती उनको बड़ी  आश,
दूर कहीं नहीं जाना बस
चलकर यहां  पर आओ
कष्ट सारे खत्म हो जाए
हरेक यहां सुविधा पाओ।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

No comments: