ताई ताऊ संवाद
***********************
****************************
**************************
ताई बोली ताऊ से....
कोरोना की भेंट चढ़ गए
नवरात्रे और नव संवत्सर
घर में छुपे बैठे सब जन
लॉकडाउन प्रभाव घर घर।
ताऊ बोला ताई से...........
बेशक कोरोना का डर हो
कृषक करें खेत में लावणी
सरसों के बाद आएगी गेहूं
शहर - कस्बा बने छावनी,
कोरोना को हराकर दम ले
भारत देश का यह नारा है
मिलकर मदद करे एक दूजे
फर्ज व ईमान यह हमारा है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
कोरोना की भेंट
***********************
******************************
रानी एक माह पहले से ही नवरात्रे एवं नव संवत्सर की तैयारी में जुटी थी। उनके सभी काम सफल हुए थे जिससे वो अति प्रसन्न थी और इस बार व्रत कर मंदिरों में जाना चाहती थी। ज्यों ज्यों समय पास आया कि कोरोनावायरस का रोग फैल गया। सरकार ने लॉकडाउन कर दिया। घर से बाहर निकलना कठिन हो गया। ऐसे में घर के अंदर ही नवरात्रे मनाए गए। व्रत भी किए किंतु मां के दर्शन के लिए मंदिर नहीं जा सकी। वो सोच रही थी कि इस बार तो नवरात्रे कोरोनावायरस की भेंट चढ़ गए। अगली बार फिर देखा जाएगा। यही सोच में में डूबी रहती थी कि पहली बार नवरात्रे मनाने का सोचा वो भी नहीं मन पाया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
हिम्मत
************************
*****************************
हार रहा है अब कोरोना
हिम्मत से लेना है काम
मार मारकर भगा देना ये
तब होगा भारत का नाम,
चाल किसी राक्षस की है
भुगत रहा सारा ही संसार
बलिदान दे देकर लोगों ने
सीखा है बस देश से प्यार,
जो हिम्मत हार जाता है
वो कहलाएगा सदा कायर
अदृश्य दुश्मन को कारना
घर में बैठना बड़ा है फायर,
जीत जाए बाजी एक दिन
उस दिन मनाएंगे दीवाली
तब तक शांत भाव से देखो
दिन अंधियारे रातें हैं काली।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
बेखबर
**************************
*****************************
लेता है हिम्मत से काम
नहीं करता कभी आराम
धरा
सीना चीर अन्न दे
बस उसे काम ही काम,
बेखबर है कोरोना से वो
कर रहा जमकर कटाई
हर जन को सहारा मिले
उसने तो राह खुद बनाई,
कभी बच्चे भूखों व प्यासे
कभी पैरों में टूटी चप्पल
सदा भाव के लिए लड़ता
सरकार लगती बे-अक्कल,
कोई रोग फैले या लड़ाई
उसने जान खेत में लगाई
अगर खेत में फसल नहीं
होगी बहुत जग में हंसाई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
***********************
****************************
**************************
ताई बोली ताऊ से....
कोरोना की भेंट चढ़ गए
नवरात्रे और नव संवत्सर
घर में छुपे बैठे सब जन
लॉकडाउन प्रभाव घर घर।
ताऊ बोला ताई से...........
बेशक कोरोना का डर हो
कृषक करें खेत में लावणी
सरसों के बाद आएगी गेहूं
शहर - कस्बा बने छावनी,
कोरोना को हराकर दम ले
भारत देश का यह नारा है
मिलकर मदद करे एक दूजे
फर्ज व ईमान यह हमारा है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
कोरोना की भेंट
***********************
******************************
रानी एक माह पहले से ही नवरात्रे एवं नव संवत्सर की तैयारी में जुटी थी। उनके सभी काम सफल हुए थे जिससे वो अति प्रसन्न थी और इस बार व्रत कर मंदिरों में जाना चाहती थी। ज्यों ज्यों समय पास आया कि कोरोनावायरस का रोग फैल गया। सरकार ने लॉकडाउन कर दिया। घर से बाहर निकलना कठिन हो गया। ऐसे में घर के अंदर ही नवरात्रे मनाए गए। व्रत भी किए किंतु मां के दर्शन के लिए मंदिर नहीं जा सकी। वो सोच रही थी कि इस बार तो नवरात्रे कोरोनावायरस की भेंट चढ़ गए। अगली बार फिर देखा जाएगा। यही सोच में में डूबी रहती थी कि पहली बार नवरात्रे मनाने का सोचा वो भी नहीं मन पाया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
हिम्मत
************************
*****************************
हार रहा है अब कोरोना
हिम्मत से लेना है काम
मार मारकर भगा देना ये
तब होगा भारत का नाम,
चाल किसी राक्षस की है
भुगत रहा सारा ही संसार
बलिदान दे देकर लोगों ने
सीखा है बस देश से प्यार,
जो हिम्मत हार जाता है
वो कहलाएगा सदा कायर
अदृश्य दुश्मन को कारना
घर में बैठना बड़ा है फायर,
जीत जाए बाजी एक दिन
उस दिन मनाएंगे दीवाली
तब तक शांत भाव से देखो
दिन अंधियारे रातें हैं काली।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
बेखबर
**************************
*****************************
लेता है हिम्मत से काम
नहीं करता कभी आराम
धरा
सीना चीर अन्न दे
बस उसे काम ही काम,
बेखबर है कोरोना से वो
कर रहा जमकर कटाई
हर जन को सहारा मिले
उसने तो राह खुद बनाई,
कभी बच्चे भूखों व प्यासे
कभी पैरों में टूटी चप्पल
सदा भाव के लिए लड़ता
सरकार लगती बे-अक्कल,
कोई रोग फैले या लड़ाई
उसने जान खेत में लगाई
अगर खेत में फसल नहीं
होगी बहुत जग में हंसाई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

No comments:
Post a Comment