मां
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बच्चे को मां प्यारी
उसका सारा संसार
निज कुर्बानी देकर
लुटा देती है प्यार,
आंचल में पलता
सारा ही ये संसार
बच्चा प्रसन्न रहे
मां है सच्चा प्यार,
कर देती है कुर्बान
बच्चे पर ही प्राण
वो ही देवी रूप है
उसको ही प्रभु जान,
मां तेरा उपकार सदा
रहेगा ऋण सा भारी
सदा फूले फले मां
प्रभु से विनती हमारी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
महिला
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आदि समय से महिला
सहती आई कष्ट हजार
कभी अपनों ने कुचली
कभी दुख सहती हजार,
सतयुग हो या हो त्रेता
या हो द्वापर की भरमार
प्यार से कम ही रखा है
कष्टों का मिला अंबार,
कितनी गई युद्धों में वो
कितनी दे गई कुर्बानी
कितनी युवा अवस्था में
जग की सहे मनमानी,
न लगता कष्ट कम होंगे
न लगता मिले सम्मान
फिर भी कलियुग में भी
औरत की अपनी शान,
जन्म देकर प्रसन्न होती है
करे लाख जिंदगी कुर्बान
मां, ममता,मां का आंचल
कहलाएगा जग की शान।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
महिला दिवस आया है
लेकर एक बड़ा पैगाम
जब तक धरा पर नारी
कमाती रहेगी सदा नाम।
ताऊ बोला ताई से........
कब से दलित रही है वो
कब तक और रहेगी दुखी
उनको दुख देकर दुनिया
ना रह सकती कभी सुखी,
संस्कार बच्चों में डालकर
बनाती जग में एक फौलाद
बेशक वो नहीं रक्षा करता
कहलाता वो मां की संतान।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
संस्कार
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बेटा अपने घर से निकलने लगा तो सामने से मां आ गई। उनके पैरों में गिरकर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा-मां आज सुबह सुबह आपके दर्शन हो गए। आपका आशीर्वाद मिल गया तो समझों मेरी सारी मेहनत सफल हो गई। देखना आज मैं जिस काम से निकल रहा हूं उसमें शत प्रतिशत सफलता मिलेगी। इतना कहकर मां का हाथ पकड़कर अपने सिर पर रख लिया। मां ने कहा-ये परिवार के बेहतर संस्कारों का परिणाम है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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बच्चे को मां प्यारी
उसका सारा संसार
निज कुर्बानी देकर
लुटा देती है प्यार,
आंचल में पलता
सारा ही ये संसार
बच्चा प्रसन्न रहे
मां है सच्चा प्यार,
कर देती है कुर्बान
बच्चे पर ही प्राण
वो ही देवी रूप है
उसको ही प्रभु जान,
मां तेरा उपकार सदा
रहेगा ऋण सा भारी
सदा फूले फले मां
प्रभु से विनती हमारी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
महिला
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आदि समय से महिला
सहती आई कष्ट हजार
कभी अपनों ने कुचली
कभी दुख सहती हजार,
सतयुग हो या हो त्रेता
या हो द्वापर की भरमार
प्यार से कम ही रखा है
कष्टों का मिला अंबार,
कितनी गई युद्धों में वो
कितनी दे गई कुर्बानी
कितनी युवा अवस्था में
जग की सहे मनमानी,
न लगता कष्ट कम होंगे
न लगता मिले सम्मान
फिर भी कलियुग में भी
औरत की अपनी शान,
जन्म देकर प्रसन्न होती है
करे लाख जिंदगी कुर्बान
मां, ममता,मां का आंचल
कहलाएगा जग की शान।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से.....
महिला दिवस आया है
लेकर एक बड़ा पैगाम
जब तक धरा पर नारी
कमाती रहेगी सदा नाम।
ताऊ बोला ताई से........
कब से दलित रही है वो
कब तक और रहेगी दुखी
उनको दुख देकर दुनिया
ना रह सकती कभी सुखी,
संस्कार बच्चों में डालकर
बनाती जग में एक फौलाद
बेशक वो नहीं रक्षा करता
कहलाता वो मां की संतान।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
संस्कार
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बेटा अपने घर से निकलने लगा तो सामने से मां आ गई। उनके पैरों में गिरकर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा-मां आज सुबह सुबह आपके दर्शन हो गए। आपका आशीर्वाद मिल गया तो समझों मेरी सारी मेहनत सफल हो गई। देखना आज मैं जिस काम से निकल रहा हूं उसमें शत प्रतिशत सफलता मिलेगी। इतना कहकर मां का हाथ पकड़कर अपने सिर पर रख लिया। मां ने कहा-ये परिवार के बेहतर संस्कारों का परिणाम है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**







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