Monday, March 09, 2020

आई होली 
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शोर मचा चारो ओर
होली की आई भोर,
रंग गुलाल डाल लो
चहुं ओर मचा  शोर,
कोई पिचकारी लेता
कोई ले  रंग गुलाल
पानी की बर्बादी कर
हो गया है बुरा हाल,
काले पीले रंग रंगे हैं
चेहरे लगते जैसे भूत
कोई होली  खुशी में
ले रहा शराब के घूट,
बच्चे, बूढ़े और युवा
डाल रहे जमकर रंग
वो मस्त मस्त चले
पी रहा जैसे हो भंग,
होली  फिर आएगी
इस आश  में बैठे हैं
कुछ को  धन घमंड
बात  बात पे ऐंठे हैं।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**





 

पेड़ और जल 
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दुलेंडी का पर्व  है
मत बहाओ  पानी
जल व पेड़  खत्म
तब आए याद नानी,
धरती का  शृंगार है
जल व पेड़  कहाते
भावी सोच  के जन
कभी न जल बहाते,
पूरी साल बहाता है
पानी को मान  हीन
जब पेड़ नहीं बचेंगे
सोचकर देखो  सीन,
बहुमूल्य जल पेड़ हैं
कर लो कृपा इन पर
जल व पेड़ बचाओ
समझाओ ये घर घर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**








ताऊ ताई संवाद

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ताई बोली ताऊ से......
होलिका जल गई अब
प्रह्लाद भक्त बच गए हैं
कलियुग में  निर्दोषों ने
पग पग पर कष्ट सहे हैं।
ताऊ बोला ताई से.......
भुला दो सभी कष्ट अब
गुलाल रंग लेकर आया
डालूंगा रंग सारे तुम पर
होली का हुड़दंग छाया,
दुष्ट जन सदा सताते  हैं
प्रत्येक युग का नजारा है
हंस लो, सुख दुख बांटो
बस यही धर्म हमारा है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




होलिका दहन

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महिला होली की पूजा कर रही थी और भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि जिस प्रकार होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गए थे ठीक उसी प्रकार पापियों को नष्ट कर दो तथा निष्पाप जनों को मान सम्मान दो। तभी एक पापी ने उनकी बात सुनी और आग बबूला होकर कहने लगा-होलिका की भांति बुरा सोचने वाली पापिन जल मरे। बड़ा मजा आएगा। उनके विचार सुनकर लोगों का ध्यान भंग होने लगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


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