Friday, November 20, 2020

 दोहा

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पत्थर पानी में पड़े, उठती एक तरंग।
उठते कभी हिलोर मन, रूप बनेगा जंग।।

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प्रार्थना
विधा-दोहे
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करो प्रार्थना रोज ही, बनते बिगड़े काम।
सुबह सवेरे नाम लो, देवों से हो नाम।।

करता कोई प्रार्थना, होता जग में नाम।
प्रभु के द्वारे लो चले, कहते उसको धाम।।

सदा प्रार्थना भली है, मिले देव का प्यार।
आगे बढ़ते जाइये, कभी नहीं हो हार।।





संंगिनी
विधा-कविता  
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स्वर्ग में बनते रिश्ते नाते,
बुजुर्ग और सज्जन बताते,
भाई बहन,माता पिता हो,
सहस्त्र वर्ष नहीं जुदा हो।

संगिनी सदा रहती याद,
देती रहती  हरदम साथ,
वो होती है  बायां हाथ,
उस बगैर लगता अनाथ।

संगिनी जब से आये घर,
नहीं रहेगा जन कोई डर,
भोजन से भरा रहे उदर,
एक है नारी दूजा है नर।

संगिनी लाती है निखार,
भर देती है तन में प्यार,
बच्चों को दे प्यार दुलार,
मिलता सदा सदव्यवहार।

संगिनी सीता श्रीराम की,
भटकी फिरी वो वन वन,
रावण का अंत करवाया,
पतित सलिल थी पावन।

संगिनी मिली पार्वती तो,
शिवभोले नंदी पर आये,
देवी देवता नृत्य कर रहे,
तीनों लोक तब मुस्कुराए।

संगिनी विष्णु देव लक्ष्मी,
पूजती रहती दुनिया सारी,
देख देख धन दौलत को,
खनक समक्ष दुनिया हारी।

सरस्वती मां ब्रह्मा संगिनी,
ज्ञान दीप जगत में जलाए,
जिह्वा पर है जिसके बैठी,
वो नर जग में नाम कमाए।

श्रीकृष्ण संगिनी रुकमणी,
राधा के संग  रास रसाये,
कभी यमुना तट पर मिले,
राक्षसों को वो मार गिराय।

शांतनु संगिनी थी ज्ञानवती,
श्रवण कुमार पुत्र कहलाए,
परशुराम उनके पैर छू रहे,
ऐसा जगत में नाम कमाये।

दशरथ की तीन संगिनियां,
कैकई ने किया ऐसा काम,
राम चले थे बनवासी बन,
हो गई थी आखिरी शाम।

लक्ष्मण की उर्मिला संगिनी,
पांडवों की संगिनी, द्रोपदी,
भरत संगिनी कहाती मांडवी,
जग के काम की पत्नी रति।

संगिनी जग में हो तारिणी,
संगिनी करती है जन काम,
संगिनी सदा साथ निभाती,
होता जग में उनसे ही नाम।।
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सूर्योपासना
विधा-कविता






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सूर्याेपसना पर्व होता है,
छठ पूजा  कहलाता  है,
दीवाली बीते  छह दिन,
अनोखा ये पर्व आता है।

पहले दिन  नहाय खाय,
खरना होता है दूजे दिन,
तीसरे दिन  सांध्य अघ्र्य,
अघ्र्य देते हैं अंतिम दिन।

युगों युगों से चला आया,
पर्व करता मन को शुद्ध,
सुर्योपासना करते रहना,
देव कभी नहीं हो कु्रध।

पूड़ी,सब्जी का कर त्याग,
चूल्हे में जलाके के आम,
प्रथम खाना  खाएगा व्रती,
करता दिनभर  शुभ काम।

सूर्य की बहन होती षष्ठी
जिसका पर्व  छठ  पूजा
बिहार का लोक पर्व हो
इससे बड़ा ना पर्व दूजा।

माता अदिति ने की थी,
पुत्र प्राप्ति को यह पूजा,
सूर्य,कर्ण, द्रोपदी ने की,
छठ मैया की बड़ी पूजा।

परिवार  प्रसन्न रहे सदा,
इसलिए पूजा करते जन,
कई बीमारियों से बचता,
स्वस्थ रहता  है तन मन।

छठ मैया कल्याण करेगी,
करते हैं यह मंगलकामना,
सदा-सदा प्रसन्न रहे जन,
दुखों का  नहीं हो सामना।

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