Sunday, November 08, 2020

 
कविता/

चौपाल***********************

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चौपाल बदली आज दिन,
करते बुजुर्ग जहां आराम,
सुबह आकर खबर पढ़ते,
जाते घर जब होती शाम।

एक दूजे का वहां पूछते हैं,
आपस में  मिल कर हाल,
घर में बेशक कद्र नहीं हो,
बैठ बजाते जन वहां ताल।

मन बहलाते बुजुर्ग जन तो,
बढ़ जाती है उनकी जिंदगी,
आपस की मिले एकता तो,
बन जाती है उनमें ही बंदगी।

चौपाल वह  स्थान होता है,
जहां होती जन समस्या हल,
एक दिन फिर  लौटेगा जब,
बढ़ेगा चौपालों में ही बल।।

संगठित
दोहा छंद रूप में
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रहो संगठित देश में, बढ़ जाएगा प्यार।
हो आपस में फूट तो, निश्चित मानो हार। 2।

मिले कहीं भी एकता, होगा जगत विकास।
दूर -दूर रहकर सदा, बनना पड़ता दास। 4।

दास कभी संसार में, नहीं मिलेगा सुखी।
उन्नति पथ पर ना बढ़े, सदा रहेगा दुखी। 6।

मिले संगठित जन कभी, पड़ती दुश्मन मार।
बिखर गया हो देश तो, हर पल होगी हार। 8।

कभी संगठित लोग हो,मिलते वो खुशहाल।
वरना जग से मानिये, रहना है बदहाल। 10।
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कुछ कहना चाहूं भी तो
कविता
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कुछ कहना चाहूं भी तो,नहीं कह पाता मैं आज,
कुछ बातें दिल में होती,छीपे रहते उम्र भर राज।
कुछ राज ऐसे भी होते, प्रकट होते वो देर सवेर,
समय सभी का आता है,लग सकती है कुछ देर।
खूब सता ले दुनिया को,हो जाएगा एक दिन ढेर,
सुंदर सरस जीवन मिला,मौका मिलेगा नहीं फेर।
पुण्य कर्म कर दुनिया में, छोड़ पाप फरेब धोखा,
सत्कर्मों से नेह लगा ले,फिर नहीं मिलेगा मौका।
धन दौलत के चक्कर में, क्यों मन में जन इतराता,
चला जाये जब जग से,फिर लौट कोई ना आता।





 दोहा/तटबंध
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कभी तटबंध टूटते, आ जाएगी बाढ़।
प्रलय कभी जन लील देे, बन सावन आसाढ़।।
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भाग्य/तकदीर/किस्मत/नसीब इत्यादि
दोहे
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किस्मत जब दे साथ जन, बन जाए सब काम।
ऊंचाई पर जन मिले, होगा जग में नाम।।

भाग्य सभी का साथ दे, तब होता है नाम।
अभागा उसे कहिये, जिसके बिगड़े काम।।

मांगे बिना धन मिले, तकदीर कहो आज।
भाग्य जिसका न साथ दे, क्या पाएगा राज।।

नसीब हो इंसान का, मिलता जग में खूब।
खुशियां छा जाए जगत, जैसे पशु को दूब।।

नसीब कभी न हो बुरा, होते बुरे विचार।
अच्छी सोच बगैर ही, जन की होती हार।।






मृत्यु
विधा-दोहा
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जीवन जन को यूं मिला, करे भलाई काम।
मृत्यु कभी इंसान की, अटल सत्य है नाम।।

जीवन जन को यूं मिला, करे भलाई काम।
मृत्यु कभी इंसान की, अटल सत्य है नाम।।

जीवन चलना नाम है, रुकना मौत निशान।
लगातार जन काम से, बनती जग पहचान।।

कैसा जीवन जन मिला, करता उल्टे काम।
मृत्यु जब कभी पास हो, होगा वो बदनाम।।

जीवन मानव को मिला, करे भलाई काम।
मृत्यु एक दिन जब मिले,अंतिम होगी शाम।।


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