दोहा ****************************
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कर लो सूर्योपासना, छठ पूजा है आज।
दानवीर सब जानते, दुनिया करती नाज।।
मन पर काबू जो करे, बने देवता रूप।
कलुषित विचार हो कभी, राक्षस है वो भूप।।
आशा जब इंसान में, करता सुंदर काम।
सोच समझ जब काम ले, होता जग में नाम।।
दोहा*****************
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कर लो सूर्योपासना, छठ पूजा है आज।
दानवीर सब जानते, दुनिया करती नाज।।
नमन उत्तरांचल उजाला परिवार
विषय- राधे केशव
दिन -शनिवार
विधा-कविता
दिनांक- 21 नवंबर 2020
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राधे केशव की जोड़ी,
जग में बनी मिसाल है,
देख देखकर जोड़ी को,
बदली सबकी चाल है।
कितनी जोड़ी बनती हैं,
यह जोड़ी बेमिसाल है,
यमुना पर रास रसाया,
देखे जो मालामाल है।
विष्णुरूप में प्रभु आये,
छवि अजब निराली है,
एक देवी का रूप बने,
करता जग रखवाली है।
कान्हा,कृष्ण,रणछोड़,
कितने ही रूप होते हैं,
दर्शन करके दोनों के,
सुख की नींद सोते हैं।
बसा आंखों में छवि,
कर डालों आंखें बंद,
प्रभु का गुणगान करो,
आवाज करो बुलंद।।
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काव्य/कविता/पद्य./ छन्द इत्यादि।
विधा-कविता
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जिसे भी देखे नशा चढ़ा,
कविता बहुत सुहाती है,
कौवा, बटेर, तीतर आज,
बड़े मधुर स्वर में गाती हैं।
चार लाइन लिख लेने पर,
समझते बड़े हैं कवि आज,
काव्य एक ऐसा रोग बना,
जैसे तन पर चलती खाज।
काव्य अब वो वस्त्र बना,
हर जन को बड़ा सुहाता,
गर्मी हो या हो सर्दी उन्हें,
दिन रात मन को ही भाता।
कविता का नशा होता है,
शराब भरी एक बोतल हो,
खड़े,पड़े,सोते जागते लिखे,
कभी हंसते कभी लेते हैं रो।
कवि हुये अजब गजब के,
लिख गये बड़ी सच्ची बात,
ऐसा काव्य लिख डाला है,
पढ़ते रहना चाहे दिन रात।।
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एकता की शक्ति
विधा-कविता
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देवों की जैसे भक्ति,
एकता में हो शक्ति,
जहां नहीं है एकता,
रोता मिलेगा व्यक्ति।
एकता में वो शक्ति,
चिडिय़ां मारे शेर को,
एक -एक सभी जले,
आग लगे ना ढेर को।
एकता बड़ी है ताकत,
हिला दे सरकार चूल,
अनेक कभी न रहना,
करना नहीं कोई भूल।
एकता घर में नहीं हो,
रावण भांति मर जाते,
एकता पांडवों में देख,
कौरव देखके डर जाते।



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