दोहा****************************
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सदा लुभाता पर्व जन, करे मन को विभोर।
जमकर देखो धूम है, नाच रहे वन मोर।।
लो दीवाली पर्व पर, कर दे शिकवे दूर।
आपस में जन मिल रहे, सारा मिटे गरूर।।
दीप मिटाये तम सदा, फैले जगत प्रकाश।
हटा बुराई तन सभी, घमंड का हो नाश।।
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दोहा *********************
शब्द-तांडव
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शिव का तांडव देखकर, जग में हाहाकार।
भोले बाबा बन कभी, करते जन जन प्यार।।
घिनौना प्रदूषण
विधा-कविता
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पटाखे चला रहे जमकर,
वाहन चल रहे धुआंधार,
होर्न बजते शोर कर रहे,
प्रदूषण से जन को प्यार।
अथाह प्रदूषण हो रहा,
उद्योग धंधे चले हजार,
कोहरा पड़ रहा जमके,
धूम कोहरा करता मार।
घिनौना प्रदूषण हो रहा,
नहीं मानते लोग बेकार,
प्रदूषण ने कितने ही मारे,
इसके समक्ष निश्चित हार।
जल, ध्वनि,वायु प्रदूषण,
भूमि प्रदूषण नया उपहार,
अभी आज अगर न माने,
मान लो एक दिन हो हार।
आपदाएं आ रही आज,
मानव को रही हैं लील,
एक दिन वो भी दूर नहीं,
जन को खाएं गिद्ध चील।



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