Saturday, November 28, 2020

 
विधा-कविता/वक्त का पहिया
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हर वक्त बदलता है, तकदीर बदलती है,
देश बदलता है,  हर तस्वीर बदलती है,
समय कभी नहीं रुका, ना रोका जाएगा,
तारीख गवाही दे, हर दिन नया आएगा।

इतिहास के पन्नों पर, लिखी है दास्तान,
मूक गवाह बनकर, करती वक्त पहचान,
जो चल गये जग से, वो वक्त तारीख है
जो आयेगा जग में, उसकी फिर शान है।

जीना मरना की, एक  निश्चित तारीख है,
समय सदा चलता है,, उसकी तारीफ है,
कोर्ट कचहरी में, जब मिलती तारीख है,
आएगी एक दिन वो,  उसकी तारीफ है।

तारीख पर सारा जग, सिमट ही जाता है,
तारीख नहीं लगती तो, जन दुख पाता है,
मुकरना तारीख है,  तो मिलना बारिश है,
तारीख निशाना है, बस दिल से लगाता है।

वक्त का पहिया, कभी रुका नहीं जग में,
यह कभी नहीं किसी से, यूं रोका जाएगा,
वक्त का पहिया रौंद, सभी को एक दिन,
वापस लौटकर, नया इतिहास बनाएगा।।
स्वस्तिक
विधा-चौका
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स्वस्तिक चिह्न
यूं लगा माथे पर
सफल काम
शुभ मुहूर्त आये
तब हो नाम
करते रहो काम
मन हो साफ
प्रभु कर दे माफ
बढ़ो आगे ही
करो दाता का जाप
होगा जरूर नाम।।
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मौसम अनुसार हास्य रस
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मरना महंगा (हास्य)
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सर्दी में मत मर जाना कभी,
चाय काफी का खर्च भारी,
रजाई गद्दा मौल बढ़ जाते,
खरीदने की बढ़ती लाचारी।

दस हजार की लकड़ी आए
200 रुपये का आए  कफन
200 रुपये के बांस भी आते
कांप उठता देख देखकर मन।

महंगाई के इस  युग में देखो
मरना भी हो  जाता है कठिन
खर्चे पर खर्चा चलता रहता है
चाय पानी पर खर्चा कई दिन।

कहीं घी मरे पर डालना होता
कभी जाना भी पड़ता गंगा जी
कितने खर्चों का  बखान करूं
आंसू बहाते रहो अपना मुंह सी।

लाखों रुपये खर्च होते काज पर
लुट जाते हैं मरने पर  बहुत घर
बुराई को समाज से मिटा डालो
काज पर बेकार में खर्च ना कर।






विषय-रिश्तों की डोर
विधा-कविता
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रिश्तों की डोर,बड़ी कमजोर,
यह वो पतंग जिसके न डोर,
आंधी आई दूर चली जाएगी,
वो पतंग फिर लौट न आएगी।

रिश्तों की डोर, जब मजबूत,
मिटाये नहीं मिट पाते सबूत,
ये रिश्ते चलते, सदियों तक,
बढ़ा सकते हैं घर के सपूत।

रिश्तों की डोर, पकड़े रखना,
रिश्तों का स्वाद सदा चखना,
रिश्तों में नहीं हो कड़वापन,
वरना टूट जाएगा तन व मन।

रिश्ते निभाना बहुत कठिन है,
सोच समझकर रिश्ते तोडऩा,
टूट गये अगर एक बार कभी,
कठिन बन जाते फिर जोडऩा।

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