दोहा छंद
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मन करता है मैं करूँ , इस दुनिया पर राज ।
सजा रहे मम शीश पर ,मरते दम तक ताज । 2।
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होय सुशीला संगिनी , दौलत मिले अपार ।
सभी नमन मुझको करें , मन करता है यार । 4।
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दोहे
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मन करता है मैं करूँ , इस दुनिया पर राज ।
सजा रहे मम शीश पर ,मरते दम तक ताज ।।
होय सुशीला संगनी , दौलत मिले अपार ।
सभी नमन मुझको करें , मन करता है यार ।।
लैला मजनू की तरह , अमर रहे यह प्यार ।
मन करता है कामना , हों भव सागर पार ।।
मन करता है कर वही , करके सोच विचार ।
कहीं छेड़ पर नार को , पिटे भरे बाजार ।।
मित्र
विधा-दोहा छंद
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मित्र उसे ही मानिये, करते जो उपकार।
कभी मुसीबत आ पड़े, मिलता उनका प्यार।।
प्यार जहां में अटल है, लुटाते मित्र यार।
दोस्त कभी हो साथ में, कभी नहीं हो हार।।
हार जीत का खेल है, जग में निश्चित मान।
मित्र संग में जब खड़े, तब होती पहचान।।
जग में हो पहचान तो, पूजे दुनिया सारी।
मित्र सखा है जिंदगी,महफिल लगती प्यारी।
व्यथा हमारी कौन सी, कब देगी संताप।
मित्र सदा ही भांप ले, दर्द का नहीं नाप।।
नाप तोल से कुछ नहीं, बदले मानव रूप।
सुंदर वो इंसान है, मित्र सम मिले भूप।।
भूप सखा सम मित्र हो, होती है पहचान।
जिसके संगी साथ दे, वो जन कहे महान।।
जगत इंसान मानते, बनो किसी के यार।
नाम कमाओ जगत में, बांटो जमकर प्यार।।
दोस्त सखा तो प्यार हैं, करते संकट दूर।
कठिनाई में जब मिले, बढ़ जाता है नूर।।
लो अजमाते दोस्त को, आज परीक्षा जान।
खरे उतरते जो कभी, उनको सच्चा मान।।
शिक्षा
विधा-क्षणिकाएं
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शिक्षा की बयार में,
युद्धभूमि के हार में,
सूदखोरी व्यापार में,
दर्द हो ऐसे कार में।
दादी शिक्षा पा रही,
पोती उन्हें पढ़ा रही,
मां उन्हें सीखा रही,
शिक्षा दिखाई दे यहीं।
चाय सा इश्क मेरा
विधा-कविता
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चाय सा इश्क मेरा,
ले लो इसका आनंद,
मन प्रसन्न हो जाएगा,
हंसी आयेगी मंद मंद।
चाय सा इश्क मेरा,
मिलता है खरा खरा,
आजमाकर देख लो,
मत रहना डरा डरा।
चाय सा इश्क मेरा,
सबके मन लुभाता,
उस खुशबू जैसा है,
हर जन को सुहाता।
चाय सा इश्क मेरा,
कड़क चाय के जैसा,
मुफ्त नहीं मिलता है,
लगता है इसका पैसा।
चाय सा इश्क मेरा,
पीकर दर्द सारा दूर,
सिरदर्द,नींद भागते,
आयेगा माथे पर नूर।
चाय सा इश्क मेरा,
परख लो आज इसे,
एक बार स्वाद लो,
बस मन में ही बसे।।
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चित्राधारित
विधा-कविता
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सुहागिन आज पुकार रही,
मेरी उम्र पति को लग जाय,
धरती पर वो नाम करे सदा,
खुद हंसे औरों को हंसाय।
हे चांद आज तू सुन ले जरा,
चांदनी में बस प्रियतम नहाय,
जैसे मैं उनके लिए सजी हूं,
वैसे ही मेरे पति को सजाय।
व्रत आज करके मैं कहती हूं,
जन्मों तक वो पति बन आये,
जैसे मन में प्रीत छुपी है अब,
अगले जन्म वो प्रीत बस जाये।
वर्षों तक मैं करवा चौथ करूं,
बस मेरी एक तमन्ना पूरी हो,
हे चांद मैं तुझे अघ्र्य दे रही,
मेरी अंतिम विनती सुन लो।
एक वर्ष तक इंतजार करती,
तब आता बस यह त्योहार,
मन में उमंग भर जाता है ये,
भर जाता है दिल में वो प्यार।।






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