Wednesday, November 25, 2020

 अर्धनारीश्वर
विधा-कविता






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शिव और शिवा का मेल,
अर्धनारीश्वर रूप कहलाए,
जग के प्राणी नष्ट होने से,
नया रूप तब प्राण बचाए।

जब ब्रह्मा की सृष्टि रचना,
जीवन उपरांत हो रही नष्ट,
घोर तप  किया शिव भोले,
अवतार लेने का दिया कष्ट।

ब्रह्मा के तप से प्रसन्न होकर,
शिव भोले ने अवतार लिया,
शिव और शक्ति दोनों मिले,
तब जीव-जंतु उद्धार किया।

स्त्री पुरुष बराबर होते जग,
शिव भोले ने उपदेश दिया,
जब जब कष्ट पड़े देवों पर,
तब ही शिव विषपान किया।

जग में शक्ति के बीना शिव,
लगते हैं वो  खुद ही अधूरे,
शिव नंदी की करते सवारी,
शक्ति शेर पर ही लगती पूरी।

एक दूजे के पूरक लगते हैं,
शिव और शक्ति मिलते जब,
सृजन होता है प्राणीमात्र का
उत्पत्ति और विकास हो तब।

सागर में जल के समान शिव,
शक्ति होती जल लहर समान,
जल बिना लहर अस्तित्व नहीं,
शक्ति के बल शिव हो महान।

शिव कारण शक्ति हो कारक,
शिव संकल्प शक्ति हो सिद्धि,
एक दूजे के बिना है विरक्ति,
शिव भक्त होता शक्ति भक्ति।

शक्ति जागृत शिव हो सुसुप्त,
शिव हृदय शक्ति है मस्तिष्क,
शक्ति सरस्वती शिव है ब्रह्मा,
शिव हो भक्त शक्ति हो इष्ट।

शिव विष्णु हो शक्ति लक्ष्मी,
शिव महादेव, शक्ति पार्वती,
शिव रुद्र शक्ति है महाकाली,
शिव देता गति, शक्ति प्रगति।

शिव और शक्ति जब मिलते,
करते है ब्रह्मांड का विस्तार,
नर-नारी दोनों ही पूजनीय हैं,
दोनों रूपों से कर लो प्यार।

अर्धनारीश्वर बनने के बाद ही,
सृष्टि का हो पाया था निर्माण,
आधा भाग शिवभोले बना था,
दक्ष पुत्री उमा बनी आधे प्राण।

फाल्गुन महाशिवरात्रि के दिन,
ब्रह्मा ने किया था सृष्टि निर्माण,
ब्रह्मा-विष्णु ने शिवलिंग पूजा,
तब से हुआ नव शक्ति प्राण।

अति फलदायिनी अर्धनारीश्वर,
देता है दर्शन भक्तों को कभी,
पूजा करते हैं देव और दानव,
पूजा करते हैं नर नारी सभी।।
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 दोहा
शब्द-अफसोस

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होता है अफसोस जब, अपने चलते चाल।
धोखा देने वाले को, मिलती मौत अकाल।।

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