दोहा ************************
************************
*************************
भाग्य सभी का साथ दे, तब होता है नाम।
अभागा उसे कहिये, जिसके बिगड़े काम।।
हंसी खुशी सी जिंदगी, होती सदा कबूल।
उसे दिवंगत मानिये, पग पग डाले शूल।।
याद दिवंगत आ रही, कई दफन हैं राज।
जमकर लड्डू खा रहे, कहते उसको काज।।
पुण्य का अहंकार
***********************
पुण्य करके दिखावा या अहंकार इंसान को गर्त में ले जाता है। पुण्य कर्म करके दिखावा करने से पुण्य फल नष्ट हो जाता है।
*************
दोहा ***************
कभी तटबंध टूटते, आ जाएगी बाढ़।
प्रलय कभी जन लील देे, बन सावन आसाढ़।।
***************
भाग्य/तकदीर/किस्मत/नसीब इत्यादि
विधा-दोहे
*************
किस्मत जब दे साथ जन, बन जाए सब काम।
ऊंचाई पर जन मिले, होगा जग में नाम।।
भाग्य सभी का साथ दे, तब होता है नाम।
अभागा उसे कहिये, जिसके बिगड़े काम।।
मांगे बिना धन मिले, तकदीर कहो आज।
भाग्य जिसका न साथ दे, क्या पाएगा राज।।
नसीब हो इंसान का, मिलता जग में खूब।
खुशियां छा जाए जगत, जैसे पशु को दूब।।
नसीब कभी न हो बुरा, होते बुरे विचार।
अच्छी सोच बगैर ही, जन की होती हार।।
ख्वाबों के दरख्त
कविता
*************************
ख्वाबों में जीते आये,
हकीकत पर आओ,
व्यर्थ में क्यों बैठे हो,
हकीकत ना छुपाओ।
ख्वाब तो लेते हैं सभी,
दरख्त मत ना उगाओ,
अच्छी बातों से अपने
इस मन को सजाओ।
ख्वाब तो, ख्वाब हैं,
कुछ नहीं है मिलता,
सपने के पौधे पर तो
कभी फूल न खिलता।
ख्वाब अगर हैं सुनहरी ,
मन हो जाता है खुश,
सपने अगर बुरे हो तो,
होता जन बड़ा दुख।
ख्वाबों के दरख्त तो,
उगाते हैं कितने जन,
हकीकत में जीना है,
खुश रहेगा तन मन।।
कविता
**********************
*******************
आदर करो मां बाप का
मिलता जन को वरदान,
काम कोई बिगड़े नहीं,
पूरे जगत में बढ़े शान।
आदर जिसने भी किया,
वो नया युग लेकर आया,
धन्य धन्य वो पूत हुआ,
उसने अमर नाम कमाया।
श्रवण कुमार को देख लो,
सभी तीर्थ घुमाकर लाया,
सदियां तक नाम रोशन है,
पितृ धर्म हंसकर निभाया।
श्रीराम ने मात पिता का,
हर आदेश सदा निभाया,
ऐसे में श्रीराम जगत में,
मर्यादापुरुषोत्तम कहाया।
माता पिता की सेवा हो,
अमोघ कवच बच्चे का,
कर लो माता पिता सेवा,
बोलबाला जग सच्चे का।।




No comments:
Post a Comment