Tuesday, November 10, 2020

शीत
विधा-दोहे
समीक्षक-आ रामगोपाल प्रयास जी
*********************
शीत लहर जब चल पड़े, होता सब कुछ शांत।
पड़ती रहती ठंड भी, हो कोई भी प्रांत।।

शीत हवा यह कह रही, उठा रजाई आज।
ठंड से नहीं जब बचे, तबियत हो नौसाज।।

सेहत बनती शीत में, आते हैं सुविचार।
मन हर्षित रहता सदा, मन करता है प्यार।।

जरसी पहनो प्यार से, बचना है अब शीत।
रजाई में छुपकर रहो, गाते रहना गीत।।
************************
स्वरचित, नितांत मौलिक
*******************
*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला-महेंद्रगढ़ हरियाणा
साहित्य संगम संस्थान
10 नवंबर 2020
विषय-रंगोली
विधा-दोहा छंद
********************
रंगोली से सज गया, पूरा ही बाजार।
बच्चों को मिलता सदा, साज बाज से प्यार।।

रंगोली घर में सजी, दीवाली का त्योहार।
फूल सजे हैं बाग में,आता जिनपर प्यार।।

रंगोली सा सज चुका, सारा ही बाजार।
दीवाली की धूम है, आये लोग हजार।।

रंगोली यह कह रही, खुशियों का संसार।
आपस में जब प्यार हो, मिटते कष्ट हजार।।






मेरी कलम मेरी पूजा कीर्तिमान साहित्य
साप्ताहिक प्रतियोगिता आयोजन
10 नवंबर 2020
विषय-प्रेम की परिभाषा
विधा-कविता
*********************
आशा और कहीं है निराशा,
सतत योग की याद दिलासा
मर गये कितने पर भेद नहीं,
यही तो है प्रेम की परिभाषा।

हीर रांझा मिट गये जहान से,
कहीं भटकते शीरी -परियाद,
नहीं भेद वो खोल सके कभी,
दिल में रहा प्रेम सदा ही याद।

शीतला वो चंद्रमा सा देता है,
कभी गर्मी सूरज सी दे अपार,
अगम, अभेद वो कहलाता है,
कहलाता है जगत में वो प्यार।

सोहनी महिवाल कह गये हैं,
अजीब, गजब, होता है प्यार,
जिनके दिल में प्यार पनपता ,
नहीं हो सकती उनकी है हार।

इंसान ढूंढता फिरता देखा है,
खोज खोजकर हुई सदा हार,
प्रेम की परिभाषा कठिन हो,
जन का आधार कहाए प्यार।।

************************
स्वरचित, नितांत मौलिक
*******************
*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला-महेंद्रगढ़ हरियाणा





मेरी कलम मेरी पूजा कीर्तिमान साहित्य
साप्ताहिक प्रतियोगिता आयोजन
10 नवंबर 2020
विषय-प्रेम की परिभाषा
विधा-कविता
*********************
आशा और कहीं है निराशा,
सतत योग की याद दिलासा
मर गये कितने पर भेद नहीं,
यही तो है प्रेम की परिभाषा।

हीर रांझा मिट गये जहान से,
कहीं भटकते शीरी -परियाद,
नहीं भेद वो खोल सके कभी,
दिल में रहा प्रेम सदा ही याद।

शीतला वो चंद्रमा सा देता है,
कभी गर्मी सूरज सी दे अपार,
अगम, अभेद वो कहलाता है,
कहलाता है जगत में वो प्यार।

सोहनी महिवाल कह गये हैं,
अजीब, गजब, होता है प्यार,
जिनके दिल में प्यार पनपता ,
नहीं हो सकती उनकी है हार।

इंसान ढूंढता फिरता देखा है,
खोज खोजकर हुई सदा हार,
प्रेम की परिभाषा कठिन हो,
जन का आधार कहाए प्यार।।


No comments: