दीपावली
विधा-कविता
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पग पग दीप जले, आज बड़ी दीवाली है,
हंसी खुशी में झूमे, ये रातें काली काली हैं।
खील मिठाई आज बटे, खूब पटाखा शोर,
लक्ष्मी पूजा बढ़ गई, नृत्य कर रहे है मोर।
गणेश जी घर आओ, संकट करना सब दूर,
मार भगाओ दुख को, चेहरे पर खिले नूर।
पूजा कर रहे लक्ष्मी, धन से घर भर देना,
इतनी विनति है मेरी, यह बस सुन लेना।।
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विधा-दोहा
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शब्द-निंदक
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निंदक कांटे सम कहो, देते रहते दर्द।
उन्हें देखकर यूं लगे, हवा चली हो सर्द।।
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स्वरचित, नितांत मौलिक
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दोहाक्षरी
विधा-दोहा
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1. शब्द-आंगन
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आंगन में जब नाचते, कौवा चिडिय़ां मोर।
देख देखकर मच उठे, घर बाहर भी शोर।।
2. शब्द-कुटि
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राम चले बनवास को, बीते कुटि दिन रात।
सीता को लक्ष्मण कहे, तुम हो मेरी मात।।
3 शब्द-पानी
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कहते पानी क्षीर है, तन मन रखता ख्याल।
गर्मी सर्दी जब रहे, जल पीना हर हाल।।
4. शब्द-साबुन
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गुरु को साबुन मानिये, अंधकार करे दूर।
उसके कदमों में हटे, मन का मैल गरूर।।
5. शब्द-निर्मल
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होता निर्मल मन कभी, कर मानव उपकार।
पुण्य कर्म करते रहो, जगत मिलेगा प्यार।।






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