दोहा धुरंधर
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शिव का तांडव देखकर, जग में हाहाकार।
भोले बाबा बन कभी, करते जन जन प्यार।।
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दीपोत्सव
विधा-हाइकु
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1
वो दीपोत्सव
सदा याद रहेगा
खुशी भरेगा
2
दीपोत्सव भी
मन को हर्षाये
सदा सुहाये।
3
दीप जलाओ
दीपोत्सव कहता
दिल सहता
4
दीपोत्सव की
खुशी मिले निराली
नौकर हाली
5
कहे पर्व ये
दीपोत्सव है आया
मन लुभाया।
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संकल्प
विधा-कविता
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दृढ़ संकल्प लिये उठे,
कर दे सुबह की शाम,
संकल्प बड़ा कठिन है,
कर देता जन का नाम।
सदा संकल्प ले चले,
होती है जगत में जीत,
संकल्परहित जीवन है
जैसे बिन मन की प्रीत।
संकल्प ऊंचा रख लो,
करते रहना फिर काम,
संकल्प में ,वादा छुपा
संकल्प हो सुंदर धाम।
संकल्प लेके,राम चले,
लंका भी हो गई नष्ट,
श्रीराम के संग रहकर
लक्ष्मण ने झेल हैं कष्ट।
हिम्मत से काम लेना,
बेशक आये आपदाएं,
आगे सदा ही बढऩा है,
बेशक सह लो यातनाएं।


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