दीपावली
विद्या-कविता
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दीवाली
निज दीपों को संग लेकर
आई आखिरकार दीवाली
रंग बिरंगे फूल बिखेरती
आई है बारात दीपावली,
जन हर्षित, पटाखे तोड़ते
हंसी खुशी फुहार छोड़ते
खाकर मिठाई प्रसन्न होते
जन दिलों की प्रीत जोड़ते,
दीप जलाकर मिटाते तम
नहीं बचा अब कोई गम
शहीदों को याद करते जाए
दीया जलाते आंखें है नम,
एक वर्ष बाद फिर आएगी
क्या क्या खुशी देकर जाए
क्या क्या गम देकर के जाए
कितने जन मिल नहीं पाएं।
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गोवर्धन
गोवर्धन अंगुली पर उठा
युग प्रवर्तक ने की सुरक्षा
इंद्र देव ने मानी हार तब
गोकुल को मिली शिक्षा।
गायों की सेवा करने का
श्रीकृष्ण ने दिया था ज्ञान
गौमाता की पूजा कर लो
बढ़ जाए धन और शान।
गायों को पालते थे कृष्ण,
गोपालक जगत कहलाए,
कितने गोकुल के लोगों के
दुख दर्द झट में मिटाये।।
दीपावली
विधा-कविता
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दीपावली का पर्व है,
उमंग- उल्लास लाता,
जब पर्व पास आये,
यादों में वो खो जाता।
हिंदु धर्म में बड़ा पर्व,
मनाते सभी धर्म लोग,
मिठाई और पकवान,
बनाकर लगे उपभोग।।
दोहा ****************************
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दीपावली सदा करे, अंधकार का नाश।
शोर पटाखों का करे, जन धन खूब विनाश।।
दीपों का यह पर्व है, मन में भरे उमंग।
होली जन से यूं कहे, तन को जमकर रंग।।
दीवाली त्योहार है, खुशियों का भंडार।
जन की बदले जिंदगी, बढ़े आपसी प्यार।।



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