Thursday, November 05, 2020

 

दोहा ************************
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तनातनी परिवार में, लेती तलाक रूप।
आज बढ़ी तकरार भी, फकीर हो या भूप।।

पाठशाला पुकारती, आओ मेरे पास।
खूब पढ़ो तुम रात दिन,रखो ज्ञान निज पास।।

पाठशाला पुकारती, ले लो ज्ञान हजार।
आपस में जग प्रेम हो, बढ़ जाएगा प्यार।।
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हमराही
छंदमुक्त कविता
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सड़ का मोड़
चलते ही जा रहे थे
हमराही संग साथी था
मन गीत गा रहे थे।
थोड़ी दूर ही चले
मिला हमको हाथी,
देखकर मस्तानी चाल
याद आ गया साथी।
किसे कहे दिल की
कभी वो थी मेरे साथ,
चलते ही जा रहे
कभी तो मिलेगी मंजिल,
राहे तकते जा रहे थे,
तारे कर रहे ज्ञिलमिल।
घर पहुंचे अपने
याद आया जमाना,
बुरे दिन यू आते हैं,
कौन किसे पहचाना।।
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सौंदर्य
कविता
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सौंदर्य की बात चले,
कमल सामने आता है,
मोर वनों में नृत्य करे,
मन को बड़ा सुहाता है।

सौंदर्य को एक पल में,
नहीं दे सकते परिभाषा,
खुशियों की महफिल है,
देती नहीं कभी निरासा।।
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स्वरचित, नितांत मौलिक





मुंतजिर आंखों से
विधा-कविता
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मुंतजिर आंखों से हो, दिल में बसा हो प्यार।
हरदिल अजीज संगी साथी, कैसे होगी हार। 2।
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हार जीत जग की रीत, सुख दुख जीवन गीत।
मुंतजिर आंखों से हो, बढ़ती जाये दिल प्रीत। 4।

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