मां
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विधा-कविता
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मां से बड़ा नहीं जगत में कोई,
बच्चा पालन करती, नहीं सोई।
बच्चा रोया तो वो खुद भी रोई,
ताउम्र बच्चों की खुशी में खोई।।
ममता की मूर्त देखी जीवन में,
अजब गजब वो देती थी प्यार।
हर कष्ट दुख दर्द मिला रोई थी,
पर हिम्मत कभी नहीं गई हार।।
स्वर्ग से भी प्यारा होता जग में,
कहलाता है वो मां का आंचल।
सर्दी,गर्मी से करे बच्चे की रक्षा,
नेक इरादे,सदा मिलते हैं अटल।।
जान देकर भी करे बच्चे से प्यार,
ऋण उतार नहीं सके रहता उधार।
नैया को पार करे,छोड़े न मझधार,
मां होती है इस जहां एक संसार।।
स्वर्ग सुख फीका, मां के चरणों में,
गर्मी भी ठंडक दे,मां के आंचल में।
मां होती है इस धरा पर इक संसार,
अजब गजब कहलाए,मां का प्यार।।
मां ममता की मूर्त,सुंदर होती सूरत,
जब तक मां होती,नहीं होगी दुर्गत।
हर कष्ट को दूर करे,करती कामना,
मौत सम्मुख खड़ी हो, करे सामना।।
स्वर्ग सम सुख देती, मां होता नाम,
लाखों सुख देती, नहीं मांगती दाम।
जी करता चरण मिले,सुबह व शाम,
मां का आंचल यूं, कहलाता है धाम।।
सलाम है उस मां को,जो करे सेवा,
साधु संत पले और पालती है देवा।
मां हर युग में मिले, प्रभु करना पूरी,
मां आशीर्वाद दो,इच्छा रहे न अधूरी।।
नमन करे उस जन्म देने वाली मां,
फिर से जन्म में मिले साथ तुम्हारा।
बहुत दिनों पहले बिछुड़ चुकी हो,
दर्द सह रहा अब होशियार बेचारा।।
शत शत नमन उस मां जननी को,
जिसके कारण इस धरा पर आया।
पिता और माता का साया साथ में,
कभी गम मिला तो उन्होंने हँसाया।।
लौट आना मां एक दिन दो दर्शन,
जब मैं अंतिम सांसे गिन रहा हूंगा।
तेरे दर्शनमात्र स्वर्ग मिलेगा मुझको,
स्वर्ग में भी मैं सुख से ही रहूंगा।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह या
दव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400








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