उसके चेहरे के सामने
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विधा-कविता
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उसके चेहरे के सामने, हुआ बड़ा एक युद्ध,
धृतराष्ट्र ने रोना रोया, दुर्योधन हुआ बड़ा क्रुद्ध।
श्रीकृष्ण ने आकर युद्ध में,पलट दिया था पासा,
जरासंध को मार डाला,भीम किया था मलयुद्ध।
दशरथ के ही चेहरे के सामने,राम गया बनवास,
मंथरा ने वो चाल चली, कर दिया था सर्वनाश।
कैकई ने मांगे तीन वर, भरत को मिला था राज,
दर्द में डूबी अयोध्या नगरी,आया नहीं कुछ रास।
उसके चेहरे के सामने, हो गया बड़ा ही विनाश,
लाटूर के भूकंप ने तो, बिछा दी जन जन लाश।
26 जनवरी 2001 का दिन,भुला नहीं कोई पाये,
घर और महल बिखर गये ऐसे जैसे पत्ते हो ताश।
उनकी नजरों के सामने ही, बम डाले सरेआम,
हिरोशिमा और नागासाकी, किया काम तमाम।
6 अगस्त व 9 अगस्त 1945 न भूलेगा जापान,
सब कुछ तबाह हो गया पल में, दर्दभरी शाम।
उसके चेहरे के सामने, जहर दे दिया प्रहलाद,
शिव शंभु चलकर आये, कालकूट आया याद।
विष्णुभक्त जीत गया, हिरण्याकश्यप गया हार,
आया समय वो भी,हिरण्याकश्यप करे फरियाद।
उसके चेहरे के सामने, जला दिया डब्बा रेल,
मारे गये सैकड़ों लोग, प्रशासन हो गया फेल।
गोधरा का वो कांड, भूले से नहीं भूला सकते,
कैसा वक्त आ गया, वैमनष्य ने खेला है खेल।
उसके चेहरे के सामने,खेला प्रकृति ने वो खेल,
सारी फसल तबाह हो गई,किसान निकला तेल।
रो रोकर बेहाल हुआ,कौन है किसान की सुनता,
बारिश ओले पड़े भयंकर,वक्त की मार है बेमेल।
उसके चेहरे के सामने, चिडिय़ा चुग लिया खेत,
मेहनत नहीं की उसने तो,बच गया सारा ही रेत।
मेहनत से जो जी न चुराए, होते वो सदा सफल,
समय पर काम करना सीख, वरना हो जाये लेट।
उसके चेहरे के सामने, मन मेेें उठा एक विचार,
देख देख सूरत उसकी, मन में उपजा था प्यार।
पता नहीं कब दिल किस पर कब आ जाएगा,
कौन किसे सुहाता है, चेहरे मिलते कई हजार।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400







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