Tuesday, May 24, 2022

वो आदमी
विधा-कविता   
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जनहित की सेवा करे, वो ही आदमी मान,
धर्म कर्म के पथ चले, होती जगत पहचान।
पाप कर्म में जीता जो, पापी निशाचर जान,
भूले से भी ना करो, किसी का भी अपमान।।

डूब रही थी नौका जब,आया देवता इंसान,
बचा लिये जन बहुत, वो आदमी पहचान।
भूला नहीं पाते कभी,ऐसा भी जन मिलता,
पूरे इस जहान में,पुण्य कर्म सब कुछ जान।।

क्या अजब जवानी थी, चेहरा रहा चमक,
बातें करना लगे सुंदर, शब्द जाल गजब।
वो आदमी दिलों में बसा, बनाई पहचान,
हँसी दिल छू रही, ललाट रहा था दमक।।

पाप कर्म से दूर रहे, मेहनत जिसका काम,
सत्कर्मों के बल पर ही, बनी हुई पहचान।
दया धर्म के पग चले, छल कपट रहे दूर,
जीता है वो शान से, मरना भी बनती शान।।

नेक नीयत का जन मिला,धन से रहे दूर,
भलाई जिसके दिल भरी,चेहरा उपजे नूर।
चुगली चाटा नहीं करे, रखे काम से काम,
कितना सज्जन है जन, देख ले जरा हुजूर।।

भलाई जिनका धर्म है, पाप कपट से दूर,
धन दौलत जन बांटता, नहीं मिले गरूर।।
पापी जन कोई मिले,छुप जा सुनके बात,
उन समस्याओं का हल,आये दिल शरूर।।

वो आदमी याद आया, जो चला परलोक,
भूला नहीं पाये जन, देता जान को झोंक।
मातृभूमि की सेवा से, बनता जग में नाम,
बुरे लोग कुत्ते सम, रहे गली गली भोंक।।

लुटा रहा धन, गरीबों में ,होगा जग नाम,
वरना एक दिन जाना है,आएगी वो शाम।।
करो भलाई जग में लो बुजुर्ग आशीर्वाद,
शान बड़ी गजब है, धरती बनती धाम।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400





















 

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