घर
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विधा-कविता
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आंधी बारिश का नहीं, जहां पर हो डर,
मन को लुभाता, जिंदगी का सहारा घर।
जहां परिवार बसते हो, नारी के संग नर,
सुबह शाम जहां भजते रहते हैं हर-हर।।
सपनों का बसता हो, जहां पर ही संसार,
मात पिता का पलता हो, जहां पर प्यार।
दुआएं मिलती हो, नित्य ही जन हजार,
सत्कर्मों का जहां पर चलता हो व्यापार।।
जन्म लेता हो जहां पर एक छोटा बच्चा,
दिल से नहीं कमजोर, घर बेशक कच्चा।
मिलता हो हर घर के प्राणी को भी प्यार,
मेरा घर सही मायने में हो वो ही सच्चा।।
युवा लेता जहां पर अदब से ही अंगड़ाई,
बच्चों में मस्ती हो नहीं मिले कभी लड़ाई।
हँसते गाते सारे सदस्य, सोते हो बीते रात,
नफरत कोसो दूर मिले,करे लोग ही बड़ाई।।
विवाह शादी जहां पर मनते कई त्योहार,
जीत ही जीत हो जहां, नहीं मिलती हार।
बच्चे बूढ़े सभी का समान होता हो आदर,
घर में कोई आता हो, कभी नहीं निरादर।।
भाई बहन में जहां पलता हो,अनहद प्यार,
बुजुर्ग बच्चों को देते जहां पर दुआएं हजार।
छोटे बच्चों को मिलता हो, जहां पर दुलार,
अच्छी बातें चलती सदा ही,नहीं हो बेकार।।
गीता महाभारत की जहां, होती रहती चर्चा,
शिक्षा की खातिर मां बाप दे बच्चे का खर्चा।
रामायण के राम को मानते जहां आदर्श देव,
जहां सर्दी गर्मी बसंत और आती हो बरखा।।
हर सुविधा मिले खाने पीने की,मन हो खुश,
प्रभु की भक्ति होती रहे,नहीं मिले कभी दुख।
ऐसा सबसे प्यारा होता है, मेरे सपने का घर,
आदर भाव पनपे बुजुर्गों के प्रति नही विमुख।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400




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