Sunday, May 15, 2022

 गंगा गये गंगादास
यमुना गये यमुना दास
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विधा- कविता


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गंगा गये तो गंगादास,
यमुना गये यमुनादास।
रंग बदलती दुनिया है,
मुश्किल है लेना सांस।।

गंगा गये तो गंगादास,
यमुना गये यमुनादास।
दाता के पास पहुंच तो,
उनको आता प्रभु रास।।

गंगा गये तो गंगादास,
यमुना गये यमुनादास।
शुद्ध मन से काम करे,
मिले प्रभु के वो पास।।

गंगा गये तो गंगादास,
यमुना गये यमुनादास।
हर रंग में रंग जाइये,
फिर करो बुराई नाश।।

गंगा गये तो गंगादास,
यमुना गये यमुनादास।
ईश्वर की लीला देखो,
बना दे राजा जो दास।।

गंगा गये तो गंगादास,
यमुना गये यमुनादास।
वही सफल संसार में,
जो बने प्रभु का दास।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400


झरोखा
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विधा-कविता
झरोखा
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झरोखा घर की शान होता,
गंदी हवा निकलती है रोज।
जिस घर में यह होता नहीं,
नहीं मिले उस घर में मौज।।


झरोखा अकसर झांकते हैं,
वो कहाते बदतर ही लोग।
झरोखे े झांकने की आदत,
कहलाता है जन का रोग।।

हर घर झरोखा मिलता है,
यह होती घर की पहचान,
गर्म हवा यहां से निकलेगी,
कहलाती है जन जन शान।।

झरोखा मिलता था कभी,
चलचित्र देखने का काम,
बच्चे आना देकर देखते थे,
सुबह होती या होती शाम।।

अच्छा घर वही मानते हैं,
जहां लगा हो रोशनदान।
ऐे घर में जो लोग बसते,
कहलाते हैं जग में महान।।
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मौलिक/स्वरचित
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*होशियार सिंह यादव
वार्ड नंबर 1, मोहल्ला मोदीका
कनीना -123027





























जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा
09416348400

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