Thursday, May 12, 2022

 सुन लो ना
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विधा-कविता   
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सुन लो ना, प्रभु मेरी यह पुकार,
कष्ट मिले जगत में, मैं गया हार।
बस एक ऋण है दाता का उधार,
मत रूठ जाना मुझसे देना है प्यार।।

सुन लो ना अब तो,तुमको पुकारूं,
दर्द में डूबे जन, किस को सहारूं।
सहारा तुम्हारा प्यारा, मिल जाएगा,
दर्शन पाकर ही दम लूंगा ना हारूं।।

सुन लो ना जग वालों, हूं अभागा,
उठ गई दुनिया, जब जाकर जागा।
तुम मेरी मंजिल हो, पास में आऊं,
तुम मेरी पतंग हो, मैं तो बस धागा।।

सुन लो ना रानी, आज हूं मैं अकेला,
रह रहकर अति कष्ट तन पर है झेला।
चले जाना है हर इंसान को एक दिन,
छोडऩा है जग को, छोडऩा है मेला।।

सुन लो ना गुरुवर, देनी है वो शिक्षा,
मेहनत करूंगा,नहीं मांगू कभी भीक्षा,
मांगकर खाने से बेहतर होता है मरना,
आगे बढ़ता जाऊं,दे देना है वो दीक्षा।।

सुन लो ना अभिभावक,देनी है शिक्षा,
वंचित नहीं रहे बच्चा,देनी है वो दीक्षा।
ज्ञान से कर देना ,मन में एक उजाला,
ऐसा नहीं हो कहीं वो मांगेंगे भीक्षा।।

सुन लो ना भक्तों की, हिम्मत रहे हार,
कल्कि अवतार लेना, देना आ के प्यार।
तुम चाहे तो पल में हो जा कष्ट सारे दूर,
बस भक्तों का एक ऋण होता है उधार।।

सुन लो ना देवियों, मेरा कर देना काम,
रोता हूं हरदम दर्द में मिलूंगा हर शाम।
उसके बगैर तो एक पत्ता भी न हिलता,
बना दो तन को एक, सुंदर सा ही धाम।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


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