मोहन
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विधा-कविता
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कितने रूप बदलकर, आते हैं भगवान,
राक्षसों का संहार के, ऋषियों से प्यार।
कभी श्रीराम बन आये, किया बेड़ा पार,
धरा के पाप मिटाने को,मिले सदा तैयार।।
मोहन रूप बनाकर आये, राधा थी साथ,
कितनी गोपी संग में नाचे,रचाया था रास।
उनके ही सूरमा बने, उनके ही बस दास,
रूप अनोखा पाया था, खुशियों भरे सांस।।
महाभारत का काल था, बन बैठे सारथी,
उनके गुणों को गाती, हर वक्त मा भारती।
पापों का कर सफाया,चले गये वो बैकुंठ,
बस उनकी घर घर में होती है एक आरती।।
मोहनी रूप बनाकर आये, देव पीते अमृत,
खुद गोपाल बने थे, जमकर खाया गौ घृत।
मोहनी रूप बनाकर, कर डाला कंस अंत,
योगी,जोगी निरखते रूप, दर्शन तरसे संत।।
सात द्वारों के ताले बंद, पल में दिये तोड़,
कहां कहां घूमे वो, जैसे नदियां लेती मोड़।
कभी बरसाने रास रसाये,गोकुल दिया छोड़,
कामी कितने बैठे थे,निकाल दी बस मरोड़।।
दो माताओं का नाम हुआ,वाह रे मुरलीवाला,
काली नदी से मार दिया,नाग बसे जो काला।
राक्षस सारे मारे गये, मुंह पर लगा था ताला,
कितने जीवनपर्यंत रटते हैं,प्रभु नाम की माला।।
कपटी मारे, संत उबारे, कर दिया जगत नाम,
कालयमन को मारा, बकासुर का काम तमाम।
माखन चोर नाम पड़ा, गायों की करे रखवाली,
कहने को वो कान्हा, करता जग की रखवाली।।
जरासंध का वध करवाया, पांडव दिया साथ,
कितनों ने पकडऩा चाहा, आया वो नहीं हाथ।
कौरवों का कर नाश, बदल दिये सारे हालात,
वो होते ऐसा सहारा,बनने ना दे कभी अनाथ।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
जाड़े की धूप
विधा-कविता
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जाड़े की धूप, लगती सुहानी,
कहीं ओस कहीं बहता पानी,
करते मिले बादल, हठखेली,
सुंदर लगे ज्यों हो नार नवेली।
जाड़े की धूप, खिलते चेहरे,
लगता मौसम पर, लगे पहरे,
धुंध और कोहरा सुबह सवेरे,
बागों में लगते हैं पंछी के डेरे।
जाड़े की धूप, बैठ पीते सूप,
तिली फूलों पर लगती अनूप,
दुल्हन का जैसे खिलता रूप,
रानी संग जैसे सुंदर लगे भूप।
जाड़े की धूप, घास पर मोती,
चमक बिखेरती, द्युति ज्योति,
पाला जमता, किसान परेशान,
सरसों महके, खेतों की शान।
जाड़े की धूप, बैठे जन हजार,
चकवा चकवी में बढ़ता प्यार,
हौसले बुलंद हो नहीं हो हार,
प्रेमी संग प्रेमिका आंखें चार।
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स्वरचित मौलिक रचना
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* डा होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वा
र्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400












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