Monday, May 23, 2022

 
 विधा- कविता/जीवन
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जीवन होता बहुत कठिन,

पंछी कहो या कहो इंसान।
जिंदगी जीते जब शान से,
बन जाती है एक पहचान।।

चुग्गा पानी करते हैं पंछी,
बच्चे को मिलता आराम।
बच्चे बड़े जब हो जाएंगे,
माता पिता का होता नाम।।

सुबह से शाम तक सफर,
करना पड़े मुश्किल काम।
जिसने जीया निज जीवन,
बन जायेगा जीवन धाम।।

कहते हैं जिंदगी जी लो,
खुशी भर लगता संसार।
अच्छा जीवन जो जीये,
मिलता जहां में प्यार।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा




विषय-जी भर के
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विधा-कविता   
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जी भर के मना लो खुशियां, जाना हो जरूर,
चार दिन की जिंदगी है, फिर किसका गरूर।
एक मुट्ठी राख बनती, फिर भी नहीं बदले,
अंतिम समय जब आएगा, खत्म हो जा नूर।।

जी भर के करो भलाई, साथ सदा यह जानी,
अहित किसी का बुरा है,करना नहीं मनमानी।
दूसरों का काम बिगड़े, मन से जो होता प्रसन्न,
एक दिन वो दिन आए, होना होगा पानी पानी।।

जी भर के खा लेना अब , बहुत कमाई करते,
जग का मालिक वो दाता,उससे ही जन डरते।
खा पी लेता जो जीवन में, वो ही होता अपना,
पाप कर्म में जो जीते हैं, वो बार बार है मरते।।

जी भर के रो लेना है, जब छोड़ गये हैं अपने,
सारे के सारे ढह जाते, कितने बनते दिल सपने।
सपनों के इस भव सागर में, बह जाते वो सारे,
भूल जाते परायों को, अपनों को पड़ते हैं रटने।।

जी भर के प्यार करो, फिर अपने पिछड़ जाते हैं,
लंबे समय तक दूर रहे, कभी कभार वो आते हैं।
चले जाते हैं राह पर जो, लौटकर नहीं आते हैं,
चाहे कितना दूर रहो, अपने बहुत ही सताते हैं।।

जी भर के गीत गा रहे साथी,सुंदर बेला आई है,
क्या अजब नृत्य कर रहे, छवि दिल में बसाई है।
एक एक पल गुजर जाये, फिर नहीं वो आता है,
गलत काम करने वालों की, हरदम हो हँसाई है।
 
जी भर के दान पुण्य करो, मिला जीवन सुंदर,
कुछ तो पापी होते हैं, कुछ का दिल है समुद्र।
गरीब आशीष देकर जाते,रखते उनको ही याद,
कभी श्रीकृष्ण याद आते हैं, कभी आते हैं इंद्र।।

जी भर के बातें कर लो, कल जाओगे अति दूर,
अपनों को देख देखके तन पर आता है इक नूर।
आओ उनको याद करें ले,जो जग को छोड़ गये,
प्रभु के चरणों में बैठना, खत्म हो जाएगा गरूर।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400




















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