Saturday, May 07, 2022

                         मां तो इक संसार है
विधा-कविता
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स्वर्ग से भी प्यारा होता जग में,
कहलाता है वो मां का आंचल,
सर्दी,गर्मी से करे बच्चे की रक्षा,
नेक इरादे,सदा मिलते हैं अटल।

जान देकर भी करे बच्चे से प्यार,
ऋण उतार नहीं सके रहता उधार,
नैया को पार करे,छोड़े न मझधार,
मां होती है इस जहां एक संसार।

स्वर्ग सुख फीका, मां के चरणों में,
गर्मी भी ठंडक दे,मां के आंचल में,
मां होती है इस धरा









पर इक संसार,
अजब गजब कहलाए,मां का प्यार।

मां ममता की मूर्त,सुंदर होती सूरत,
जब तक मां होती,नहीं होगी दुर्गत,
हर कष्ट को दूर करे,करती कामना,
मौत सम्मुख खड़ी हो, करे सामना।

स्वर्ग सम सुख देती, मां होता नाम,
लाखों सुख देती, नहीं मांगती दाम,
जी करता चरण मिले,सुबह व शाम,
मां का आंचल यूं, कहलाता है धाम।

सलाम है उस मां को,जो करे सेवा,
साधु संत पले और पालती है देवा,
मां हर युग में मिले, प्रभु करना पूरी,
मां आशीर्वाद दो,इच्छा रहे न अधूरी।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400






मां
विधा-देव घनाक्षरी
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मां नाम सुंदर होता, बच्चे वास्ते वरदान।
उससे बड़ा नहीं हो, करते उसको नमन।।

जन्म देती है बच्चे को, पाल पोष करे बड़ा।
पहली शिक्षक होती, खिला देती वहीं चमन।।

बार बार प्रणाम है, मां होता प्यार संसार।
नहीं कभी भूला पाएं, उस मां को करे नमन।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 094163484
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