Monday, January 04, 2021


 दृढ़ संकल्प
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दृढ़ संकल्प करें हम मन से,
हिंदी का उत्थान करेंगे।
हिंदी मातृभाषा है भारत की,
जमकर के प्रचार करेंगे।।

जरा सुनो
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आज का विषय-
 केंद्र और किसानों की आखिरी बैठक क्या आज निकलेगा हल

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किसानों का मुद्दा पेचीदा है जिस पर नजरें टिकी हैं। प्रभु से प्रार्थना है कि कोई हल निकल आये।वरना समस्या बढ़ेगी।
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 दोहा
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नीच कर्म की जिंदगी, पाप भरा दिल कोष।
झूठ कपट विश्वास हो, वो कैसे निर्दोष।।

मन का मोती मानकर,करो भलाई काम।
जाना है जग छोड़के, आएगी फिर शाम।।

मात पिता हैं देवता,रखते पूरा ख्याल।
सुबह शाम जल पान दे, पूछो उनका हाल।।


नमन दोहा
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नीच कर्म की जिंदगी, पाप भरा दिल कोष।
झूठ कपट विश्वास हो, वो कैसे निर्दोष।।

भला सभी का कर रहे, लुटा रहे दिल कोष।
झूठ कपट में लीन जन, मान रहे निर्दोष।।

झूठ कपट में लीन जन, मान रहे निर्दोष।।
नीच कर्म की जिंदगी, पाप भरा दिल कोष।

झूठ कपट में लीन जन, मान रहे निर्दोष।।
झूठ कपट में लीन जन, मान रहे निर्दोष।।

मन का मोती मानकर,करो भलाई काम।
जाना है जग छोड़के, आएगी फिर शाम।।

मात पिता हैं देवता,रखते पूरा ख्याल।
सुबह शाम को याद कर, पूछो उनका हाल।।





हसीं ख्वाब
विधा-कविता
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ख्वाबों में जीते आये,
हकीकत पर आओ,
व्यर्थ में क्यों बैठे हो,
हकीकत ना छुपाओ।

ख्वाब तो लेते हैं सभी,
हसीं ख्वाब न उगाओ,
अच्छी बातों से अपने
इस मन को सजाओ।

ख्वाब हो तो हसीं हो
कुछ भी नहीं मिलता,
सपने के पौधे पर तो
कभी फूल न खिलता।

ख्वाब अगर हो हसीं ,
मन हो जाता है खुश,
सपने अगर बुरे हो तो,
होता जन बड़ा दुख।

हसीं ख्वाब गर उगते
तो उगाते कितने जन,
हकीकत में जीना है,
खुश रहेगा तन मन।।


कलम जब तड़प उठी
विधा-छंदमुक्त कविता
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कलम जब तड़प उठी,
वीरों की गाथ लिखने,
पर दुश्मन की तलवार,
रोक न पाई वार को।

कलम सदा कलम करे,
दुश्मन, दोषी सदा डरे,
नेपोलियन भी डरते थे,
कलम मार लेखक की।

कलम ने दिया काव्य,
मन हो जायेगा प्रसन्न,
कलम खुशी भर देती,
कलम करती सम्मान।

कलम मार जिसे पड़े,
रोता फिरे गलियों में,
कलम सार निचोड़ दे,
दिल से चाहे सज्जन।

कलम सदा चलेगी यूं,
झुकने नहीं पाये कभी,
कलम की ताक देखो,
नमन करो कलम सभी।
 












कविता
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मिट्टी से अन्न पैदा हो
माटी जीवन आधार है,
माटी सोचा उपजाती है,
मिट्टी से करते प्यार है।

जन्म लिया इस माटी में,
माटी से मिले संस्कार हैं,
माटी का चंदन करते है,
माटी का ऋण उधार है।

सदियां बीत गई यहां पे,
माटी में कितने आये गये,
एक चला  जब जाता है,
कई और पनपता हैं नये।

किसान का आधार माटी,
पैदा करता  है फल फूल,
माटी छूकर नमन कर लो,
माटी का चंदन ले कबूल।

माटी में पैदा होता जीव,
माटी उसकी हरती पीव,
माटी अपार जीवन देती,
माटी पर टिकी सब नींव।।

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