कविता
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खत्म करो दिन रात तो,
नहीं मिलेगा कोई हल,
शुद्ध पेयजल कह रहे,
नहीं मिलेगा फिर कल।
जीवन देने वाला अमृत,
कहलाए जीवन का हल,
रोक लो बहते जल को,
मत बहाओ खुलके नल।
जल बिना तड़प कर मरे,
धरती का हर जीवधारी,
जल से बढ़कर कुछ नहीं,
पुकार कर कहे धरा सारी।
पक्षी भी अब तड़प रहे,
अब पानी कहां से आए,
जल बिना जीना कठिन,
जीवन कौन अब बचाये।
कलम
विधा- दोहा
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करो कलम सिर दुष्ट का, बोलो जय जय राम।
परहित में जीवन लगा, होगा जग में काम।।
नहीं कलम को तोडऩा, आती लेखन काम।
सुंदर दोहे तुम लिखो, होगा लेखक नाम।।
देख कलम की मार को, दुश्मन रोते आज।
अच्छा लेखन जो करे, कभी नहीं हो हार।।
सदा कलम जन पास हो, लेखन सदा विचार।
देश प्रेम के लेख से, उपजे जन मन प्यार।।






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