राष्ट्रभक्ति
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राष्ट्रभक्ति जन जन भरी हो,
वो भारत हमारा प्यारा है,
माटी इसकी चंदन सम है,
जन जन का राजदुलारा है।
जहां पूजा होती वीरों की,
मेरा देश मेरा जवानों का,
दुश्मन भी थर थर कांपते,
यह देश बड़ा विद्वानों का।
फांसी खाते देर नहीं की,
सरदार भगत सिंह प्यारा,
राजगुरू और सुखदेव का,
जोश और जनून था न्यारा।
आजाद थे वो आजाद रहे,
आजादी के लिए कष्ट सहे,
बापू व बोस जान से प्यारे,
कुर्बानी याद कर आंसू बहे।
एक से बढ़कर एक वीर है,
किस किस का बखान करूं,
वीरों का नाम ना छूट जाए,
सोच सोच यह बात मैं डरूं।
भारत भूमि
विधा-कविता
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सबसे न्यारी, सबसे प्यारी,
वीरों की भारत भूमि न्यारी,
चले गये भारत छोड़कर वो,
कहलाते थे जग अत्याचारी।
सुभाष,भगत सिंह की भूमि,
सींचा है अपने ही खून से,
फांसी खाई कुर्बानी दे डाली,
बचाया इसको,गैर कानून से।
भारत भूमि पर हल चलाते,
उपजाते हैं अन्न देश किसान,
इसकी महिमा जगत जानता,
सभ्यता संस्कृति है पहचान।
नहीं हुआ है नहीं कोई होगा,
गंगा, यमुना जहां बहती आज,
हरदिल अजीज यहां के नेता,
करते आये हैं दिलों पर राज।
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राष्ट्रभक्ति
विधा-कविता
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भरा हुआ जोश दिलों में,
हमने ये कसम उठानी है,
दुश्मन को पल में मारेंगे,
दिल में बस यह ठानी है।
देशों में बड़ा देश हमारा,
लगता हम को प्यारा है,
शिक्षा दीक्षा में सर्वोपरि,
आंखों का यह तारा है।
हर क्षेत्र में नाम कमाते,
किसान कहो या मजदूर,
एक बार जो सामने आये,
पल में कर दे चकनाचूर।
आजाद किया है वीरों ने,
कर लो नमन आज सारे,
सुभाष, भगत से वीर हुये,
लगते मन को अति प्यारे।
गणतंत्र आज मना रहे है,
संविधान अजब महान है,
ऐसा संविधान दिया भारत,
इसलिये जगत की शान है।
इंद्रधनुष
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कई रंग का पुंज हमारा,
इंद्रधनुष सम जीवन प्यारा।
जीवन भी रंगीन हमारा,
पल में हो जाये प्रभु प्यारा।।
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दोहा
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मात पिता खामोश अब, बहु बेटे का राज।
साली साला मौज में, सास ससुर पर नाज।।
अमल नहीं हो घोषणा, नेता पसंद ख्वाब।
लोग दर्द में जी रहे, दोषी कौन जनाब।।
मेहनत को जन भूलकर, किस्मत देते दोष।
नहीं बने जब काम तो, मन मेें पनपे रोष।।









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