Sunday, January 03, 2021

उमंग/उल्लास विधा-दोहे
*************

*****************************

*****************************
भोर सुहानी देखकर, मन में उठी उमंग।
उदित सूर्य ने छेड़ दी, रात दिवस की जंग।।

करो वंदना देव की, होगा फिर कल्याण।
मन में उमंग जोश से, खिले तन और प्राण।।

नव उमंग तन में भरा, आया नूतन वर्ष।
खुशियां बांटो जग सदा, होगा मन को हर्ष।।

सुनों बांसुरी धुन कभी, मन में उठे उमंग।
साथ ढोल की थाप पर, उभरे सुंदर रंग।।

प्रकृति शृंगार कर रही, मन में उठे उमंग।
फूलों का रस चूसते, भंवरे  बने  मलंग।।


नसीब वाले तो हम हैं
विधा-कविता
*********************
*********************

भरत की भूमि भारत,
इसकी भूमि में दम है,
भारत में मैं पैदा हुआ
नसीब वाले तो हम हैं।

हरियाणा में हरि आये,
प्रदेश मेरा गीता सम है,
हरियाणा प्रांत नाम मेरा,
नसीब वाले तो हम हैं।

राजा महेंद्र प्रसिद्ध हुये,
महेंद्रगढ़ जिला है मेरा,
यह जिला गीता सम है,
नसीब वाले तो हम हैं।

कान्हा का गांव कनीना,
जनपद का यह उत्तम है,
यहीं पर मैं पैदा हुआ हूं,
नसीब वाले तो हम हैं।

मोदीने बसाया मोदीका,
मोहल्ले के वासी हम हैं,
यहां पर झोपड़ी है मेरी,
नसीब वाले तो हम हैं।

अशोक चक्र विजेता हैं,
खाये छाती पर बम हैं,
दुश्मन को मार गिराया,
नसीब वाले तो हम हैं।

वीरों की कनीना भूमि,
सुन आंखें होती नम हैं,
वीरों के सदा याद करे,
नसीब वाले तो हम हैं।

मंत्री, संतरी भारी हुये ,
मेरे गांव में भी दम है,
मोलडऩाथ बाबा धरा,
नसीब वाले तो हम हैं।

बाबा रामदेव जहां से,
ऋषि से  नहीं कम हैं,
पड़ोसी गांव बाबा का,
नसीब वाले तो हम हैं।

सोकर उठा जब गांव,
सभी ने हमें दी बधाई,
नहीं किसी से कम हैं
नसीब वाले तो हम हैं।

काव्य प्रतियोगिता हुई,
हमने भी नाम कमाया,
साहित्य मेला में दम है,
नसीब वाले तो हम हैं।

जन्म हुआ हम छोटे थे,
सब ने हमें गोद उठाया,
इंसान हैं न कोई बम हैं,
नसीब वाले तो हम हैं।

गेहूं, सरसों,बाजरा हो,
उत्तम होती शलजम हैं,
रेतीला इलाका हमारा,
मेहनम में नहीं कम हैं।

घी,दूध खूब मिलता है,
छाछ पीते, नहीं रम है,
हट्टे कट्टे लोग यहां,
नसीब वाले तो हम हैं।
**********************



बढ़ते कदम
विधा-कविता
*********************

***********************










बढ़ते कदम देश के,
हो रहा  है विकास,
उद्योग धंधे बढ़ गये,
धन दौलत जन पास।

बढ़े कदम इंसान के,
पहुंचा चांद पर आज,
बहुत दिनों से छुपे थे,
खुल जाएंगे सब राज।

बढ़ते कदम औरत के,
नहीं है किसी से कम,
हर क्षेत्र में आगे बढ़ी,
बढ़ा बहुत उसमें दम।

बढ़ते कदम युवा के हैं,
उन पर भारत का नाज,
मुमकिन कर दिखलाया,
एक दिन करें जग राज।

बढ़ते कदम हैं प्रदेश के,
हरियाणा उसका है नाम,
कनीना के हम  वासी हैं,
दिल धड़काना है काम।।

No comments: