दोहा
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प्रेम भरी वो शायरी, तन पर है शृंगार।
आंखें उसकी मदभरी, होठों पर है प्यार।।
दोहा *************************
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सरकारें आईं गईं , निभा गईं किरदार ।
पर हलधर के हाल में , कोई नहीं सुधार ।।
कोई नहीं सुधार , सभी ने उसे दबाया ।
बेशक मरे किसान ,तरस ना उस पर आया ।।
कर्ज बड़ों का माफ, कहाँ हलधर सिर मारें ।
रखें मसीहा नाम , करें शोषण सरकारें ।।
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कुंडलियां, ***********************
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शोषण भी होता रहा , मरता रहा किसान ।
पर सत्ता उस पर हुई , कभी न मेहरबान ।
कभी न मेहरबान , हमेशा उसे दबाया ।
गए मुग़ल अंग्रेज , राज अपना भी आया ।
पैदा कर खाद्यान्न ,किया जनता का पोषण ।
अपने बन बेदर्द , करें हलधर का शोषण ।।
बढ़ते कदम
विधा-कविता
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बढ़ते कदम देश के,
हो रहा है विकास,
उद्योग धंधे बढ़ गये,
धन दौलत जन पास।
बढ़े कदम इंसान के,
पहुंचा चांद पर आज,
बहुत दिनों से छुपे थे,
खुल जाएंगे सब राज।
बढ़ते कदम औरत के,
नहीं है किसी से कम,
हर क्षेत्र में आगे बढ़ी,
बढ़ा बहुत उसमें दम।
बढ़ते कदम युवा के हैं,
उन पर भारत का नाज,
मुमकिन कर दिखलाया,
एक दिन करें जग राज।
बढ़ते कदम हैं प्रदेश के,
हरियाणा उसका है नाम,
कनीना के हम वासी हैं,
दिल धड़काना है काम।।
बधाई गीत/लोकगीत विधा में
विधा-लोकगीत
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बधाई रे बधाई
तूने नया साल बधाई।
एक वर्ष बीत गया,
जब नई साल आई,
बधाई.................
चला गया दुष्ट
तबाही खूब मचाई,
रोग दोष दिये ,
लोग मारे दुहाई,
बधाई रे...................
बुरा बीता साल
कर दिया बुरा हाल
अच्छे आये दिन
खाये हम मलाई
बधाई रे....................
नया साल लाया है
खुशियों की सौगात,
मन की कली सजाई
नई भोर एक आई
बधाई रे................
बधाई रे बधाई
तूने नया साल बधाई।
एक वर्ष बीत गया,
जब नई साल आई,
बधाई.................






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