दोहा शब्द-सिक्का
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खोटा सिक्का मानते, होता है बेकार।
वक्त पड़े वो काम का, कर लो सोच विचार।।
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सिक्का
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खोटा सिक्का भी कभी, जग के आए काम।
कभी कभी परिवार में, खोटा करता नाम।।
उड़ती पतंग देखकर, दुनिया गाये गीत।
धरती पर गिरता कभी,धट जाती है प्रीत।।
शब्द-सिक्का
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सच्चे से खोटा भला, वक्त पड़े दे काम।
मिले पुराना गुड़ सदा,मिलता महँगे दाम।।
शब्द-सिक्का
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सच्चे से खोटा भला, वक्त पड़े दे काम।
मिले पुराना गुड़ सदा,मिलता महँगे दाम।।
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तस्वीर
विधा-दोहा छंद
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नाम रखा इंसान का, वैसी थी तस्वीर।
चतुराई को देखकर, दूर हुई मन पीर।।
देख रहे तस्वीर को, लगे जान पहचान।
अजब गजब की सोच से,बढ़ी जगत में शान।।
पड़ी मिली तस्वीर तो, वो लगता था भूप।
मेरा बच्चा था वहीं, कहते उसे अनूप ।।
माना इस तस्वीर में, भरे हुये हैं रंग।
देख देख उसको लगे, छेड़े मन की जंग।।
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शादी सालगिरह
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पल पल बीते शुभ घड़ी,
हाथों में खुशी की छड़ी,
आएगी शादी सालगिरह,
सदा हँसो नही हो विरह।
श्रीगणेश बुद्धि बल देगा,
मां सरस्वती ज्ञान भर दे,
शिवभोले मन तप भर दे,
विष्णु देव मंगल कर दे।
सारे जगत में नाम मिले,
मन के सारे फूल खिले,
यौवन की बरसे फुहार,
मिले नहीं जग में हार।
सांझ सवेरे ले प्रभु नाम,
बनते रहेंगे बिगड़े काम,
कभी ना वो आये शाम,
परम पद मिलेगा धाम।
दुष्ट सारे पड़े कमजोर,
मन के हरदम नाचे मोर,
कीर्ति का मचा रहे शोर,
खुशियों की आये भोर।।
शिक्षा
विधा-कविता
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शिक्षा होती संपदा , बढ़ता बांटो ज्ञान।
शिक्षा जग आधार है,क्यों नर है अज्ञान।।
शिक्षा बिन जीवन नरक, शिक्षा हो उपहार,
सोच समझ इंसान तू, शिक्षित बने महान।।
पोथी जमकर कह रही,पढऩा लिखना सीख।
शिक्षा से मुंह मोड़ के , नहीं मिलेगी भीख।।
खूब पढ़े किस काम का, करे नहीं जब दान,
शिक्षा दीक्षा दे सभी, वरना जग में झीख।।
घर घर शिक्षा से बने, बच्चों की पहचान।
पढ़ लिखकर करते सदा,भारत का सम्मान।।
पढऩा लिखना काम का, सेवा दिल में भाव,
भव सागर से पार हो, मिलता शिक्षा ज्ञान।।
पढऩा लिखना काम का, सेवा दिल में भाव।
पूरे जग में नाम हो, शिक्षा है वह नाव।।
जग का साथी मानते, शिक्षा जगत स्वरूप,
अनपढ़ रहते लोक में, भूल गया जन दाव।।
शिक्षा रूपी नाव में, जो होता है सवार।
जीवन नैया पार हो, जग का मिलता प्यार।।
ज्ञान नाम का दीप है, जगत गुरू का नाम,
शिक्षा दीक्षा दान दे, होगी कभी न हार।।
खोट शिष्य के जान के, देना उसको ज्ञान।
सही वक्त गुरु जान के, देेता शिक्षा दान।।
शिक्षा से जो जोड़ता, लगता नाता धाम,
हर जन का यह रूप है,मानव बने महान।।
चोरी का डर भूल जा, ले लो शिक्षा ज्ञान।
वक्त पड़े तो काम दे, मत रहना अज्ञान।।
शिक्षा को धन मान कर,करो सदा अभ्यास,
जितनी शिक्षा पा सको,बढ़ जाता है मान।।
शिक्षा मन का आइना, रखना हरदम ध्यान।
कूड़ा कचरा ढोइये, बिन शिक्षा बिन ज्ञान।।
शिक्षा बिन जीवन नरक, शिक्षा हो उपहार,
सोच समझ इंसान तू, क्यों करता अभिमान।।
छोटे बच्चे गा रहे, मिलजुल कर सब गीत।
शिक्षा दीक्षा खूब लो, तभी करे जग प्रीत।।
नाम कमाओ जगत में, तब हो बेड़ा पार,
शिक्षा दामन थाम ले, यह है मन का मीत।।





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