Monday, January 18, 2021

 







असली भारत गांव में है
विधा- मुक्तक
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असली भारत गांव में है।
सागर इसके पाँव में है।।
महानता बेहद निराली,
मजा अति कांव कांव में हैं।।


जरा सुनो
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आज का विषय-  व्यक्ति का असली धर्म उसके कर्तव्य हैं
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अधिकार तो कोई भी जमा सकता है किंतु अधिकारों के पीछे व्यक्ति के कत्र्तव्य निहित हैं जिनका पालन असली धर्म है।



जीवन का सार समक्ष मगर,
  हम इसको स्वयं नकार रहे हैं।
बुरी आदतों के बल पर ही,
  अपने जीवन में यूं हार रहे हैं।।

 
 
नमन दोहा **************************** **************

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नाम उन्हीं को चाहिये, करेे नहीं जो काम।
काम काज जो कर रहा, खुद ही होता नाम।।


नई नवेली नार तो, करती खूब विनोद।
सजती रहती प्रेम में, बैठ पिया की गोद।।

मौसम भी दिखला रहा, बहुत सजीला रूप।


छटा धुंध की छा रही, खिलती पल में धूप।।



लाला लाजपतराय
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गरम दल के नेता थे,
कहलाते थे लाजपत,
अग्रवाल परिवार था,
नमन उनको शत शत।

लाल बाल पाल नाम,
प्रसिद्ध हुआ जगत में,
पीएनबी की स्थापना
प्रसिद्ध हुआ भारत में।

हरियाणा में वकील थे,
हिंदी का  चाहा प्रसार,
आर्य समाज के पक्षधर,
पंजाब में  किया प्रचार।

पंजाब केसरी कहलाए,
अकाल में की थी सेवा,
पूरा जग उन्हें याद करे,
वो देश के कहाए देवा।

साइमन कमीशन आया,
जमके किया था विरोध,
पापी डायर कहर बरपा,
कैसा लिया उन्होंने शोध,

एक एक कथन कहा जो,
सिद्ध हुआ कफन कील,
जनरल डायर जाके छुपा,
गोली द्वारा गया वो लील।
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कागज के कोरे पन्ने, चूमती कलम....
विधा-कविता
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दिल में अरमान भरे, लिखूंगा आज,
कितने ख्वाब लिये है, छुपे हुये राज,
पाती अपनी मैं लिखूं, कहता बलम
कागज के कोरे पन्ने, चूमती कलम।

खुशी और गम लिखूं, झेले अति मैने,
कभी क्रोध में आया, अंदाज रहे पैने,
पर मंै वो ही लिखूंगा, पसंद हो सनम,
कागज के कोरे पन्ने, चूमती कलम।

जिंदगी एक बुलबुला,कहते आये संत,
कोई अमर नहीं है, होना सबका अंत,
जीते जी न होने दूंगा, कोई भी जुलम,
कागज  के कोरे  पन्ने, चूमती कलम।

खुशियां जग में मिले, खोज ले आज,
मन को हर्षाती सदा, होती साज बाज,
दुख मन सताते जन के, छोडऩा अलम,
कागज  के कोरे  पन्ने, चूमती कलम।

मन की करेंगे, नही जीवन मिले फेर,
परहित में कमा करे, लगा न पाप ढेर,
नहीं कुछ कर पाये तो लेंगे फिर जनम,
कागज  के कोरे  पन्ने, चूमती कलम।


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