वीरभूमि
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संस्कृति का द्योतक देश
कोरोना बीमारी आई है
लड़ लड़के मर गए कई
कितनों ने जान बचाई है,
हाथ जोड़ प्रणाम करते
हाथ मिलाना बुरा मानते
हाथ मिलाकर बातें करे
रोग यूं फैलते जानते हैं,
ऋषि मुनियों की धरा है
शांत रहकर करते है तप
रोगों को दूर भगा देता है
भारतीयों का तप व जप,
खाना खाते हाथ धोते है
पुरानी संस्कृति कहलाती
साबुन से हाथ धोते रहो
तो कोई बीमारी न आती,
शिक्षा क्षेत्र में प्रसिद्ध देश
शिक्षाविदों की है ये खान
शिक्षा का प्रचार करते हैं
मेरे देश की बढ़ती शान।
**होशियार सिंह, कनीना,हरियाणा**
लघु कथा मास्क
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राजू ने जमकर प्रचार किया कि वो 500 मास्क बांटेगा ताकि लोग रोग से बच सके। उन्होंने अधिकारियों को भी बुलावा भेजा। निर्धारित स्थान पर भारी भीड़ हो गई। भारी संख्या में लोग आकर इकट्ठे हो गए। अधिकारियों के सामने हल्के दर्जे के मास्क लेकर राजू सहित करीब दस व्यक्ति पहुंचे। अधिकारियों के हाथों मास्क बांटने का काम शुरू किया गया। अधिकारियों को एक एक मास्क दिया गया और फिर आया आम जन को मास्क देने का मौका।
राजू ने अपने नजदीकी को दो मास्क दिए ही थे कि राजू के दोस्त चिल्लाए-एक एक व्यक्ति को दो दो मास्क कैसे दे रहे हो? इससे छीनो एक मास्क।
दो मास्क लेने वाले व्यक्ति ने स्वयं ही एक मास्क वापस कर दिया किंतु तभी उसके दिमाग में आया कि जब ये लोग बांटने वाली चीज को भी वापस ले रहे हैं मास्क बांटने का दिखावा कर रहे हैं। व्यक्ति ने दुखी मन से लिया हुआ शेष एक मास्क भी वापस करते हुए कहा-लो, अपना यह मास्क भी ले लो। मुझे जरूरत नहीं। मैं तो मुंह पर साफ कपड़ा ही ढक लूंगा। इसकी जरूरत जिसे हो दे दो।
मास्क बांटने वालों ने लपककर मास्क व्यक्ति से लिया और बुड़बुड़ाए कि यह मास्क किसी ओर को देंगे। खड़ी भीड़ तमाशा देख रही थी कि जिस व्यक्ति से दो मास्क देकर दोनों छीन लिए उससे रहा न गया और कहा-भाइयों, तुम तो महज मास्क बांटने का दिखावा कर रहे हो ताकि तुम्हारा समाचार छप जाए और तुम प्रसिद्धि पा सको। अच्छा हो एक ही मास्क ले आते और सभी को एक बार देकर वापस ले लेते। तुम्हारा नाम भी होता और लोग मास्क को देखकर मन भर लेते। इतना सुनकर मास्क बाटने वालों की आंखें खुुल गई। उन्होंने मास्क वापस व्यक्ति को देना चाहा किंतु वो अति जिद्दी था। उसने कहा-हर किसी का स्वाभिमान होता है। स्वाभिमान पर ठेस करना उचित नहीं है। तुम तो दिखावा करने वाले लगते हो। इतना कहकर व्यक्ति आगे बढ़ गया। भीड़ उस व्यक्ति को एकटक देखती रही।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
जन्म
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नौ माह गर्भ में पड़ा रहा
सहने पड़े थे कितने कष्ट
इंतजार रहा जग देख लूं
इच्छा से हुए थे दर्द नष्ट,
मां को पेट में मारी लात
प्रसन्न हो मां दे रही साथ
मां की ममता होती अमर
मां -ममता की क्या बात,
कभी ना वो खाया मां ने
जिसका हो मुझे नुकसान
मां की वेदना मां ही जाने
यूं है मां की निराली शान,
आखिरकार जन्म पाया मैं
आया इस स्वार्थभरे संसार
मां की ममता कम ना हुई
मिलता रहा स्वर्ग सा प्यार,
जन्म देकर मां धन्य हुई है
अब मैं मां का हूं आभारी
ऋण कभी नहीं चुका पाऊं
ये ऋण सदा रहेगा उधारी।
--
घुड़मचगाड़ी
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ग्राम्य जीवन सुंदर था
चला करती बैलगाड़ी
बैलों से हल चलते थे
सवारी में घुड़मचगाड़ी,
जनहितैषी प्यारी भाषा
सहयोग पूर्ण रवैया था
टीवी,फोन नहीं होते थे
गांव-गांव में गवैया था,
हट्टे कट्टे गबरू होते
घी,दूध, दही का खाना
रोटी सिर रख ले जाती
शाम ढले लौटके आना,
घी,शक्कर हाली खाते थे
मेहनत करते थे दिनरात
पूरा परिवार करे लावणी
बटाते एक दूजे का हाथ,
लुप्तप्राय हुई है बैलगाड़ी
निभाती थी किसान साथ
लौटकर आएगा फिर युग
यादव कहता सुन लो बात।
**होशियार सिंह,कनीना,हरियाणा**
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संस्कृति का द्योतक देश
कोरोना बीमारी आई है
लड़ लड़के मर गए कई
कितनों ने जान बचाई है,
हाथ जोड़ प्रणाम करते
हाथ मिलाना बुरा मानते
हाथ मिलाकर बातें करे
रोग यूं फैलते जानते हैं,
ऋषि मुनियों की धरा है
शांत रहकर करते है तप
रोगों को दूर भगा देता है
भारतीयों का तप व जप,
खाना खाते हाथ धोते है
पुरानी संस्कृति कहलाती
साबुन से हाथ धोते रहो
तो कोई बीमारी न आती,
शिक्षा क्षेत्र में प्रसिद्ध देश
शिक्षाविदों की है ये खान
शिक्षा का प्रचार करते हैं
मेरे देश की बढ़ती शान।
**होशियार सिंह, कनीना,हरियाणा**
लघु कथा मास्क
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राजू ने जमकर प्रचार किया कि वो 500 मास्क बांटेगा ताकि लोग रोग से बच सके। उन्होंने अधिकारियों को भी बुलावा भेजा। निर्धारित स्थान पर भारी भीड़ हो गई। भारी संख्या में लोग आकर इकट्ठे हो गए। अधिकारियों के सामने हल्के दर्जे के मास्क लेकर राजू सहित करीब दस व्यक्ति पहुंचे। अधिकारियों के हाथों मास्क बांटने का काम शुरू किया गया। अधिकारियों को एक एक मास्क दिया गया और फिर आया आम जन को मास्क देने का मौका।
राजू ने अपने नजदीकी को दो मास्क दिए ही थे कि राजू के दोस्त चिल्लाए-एक एक व्यक्ति को दो दो मास्क कैसे दे रहे हो? इससे छीनो एक मास्क।
दो मास्क लेने वाले व्यक्ति ने स्वयं ही एक मास्क वापस कर दिया किंतु तभी उसके दिमाग में आया कि जब ये लोग बांटने वाली चीज को भी वापस ले रहे हैं मास्क बांटने का दिखावा कर रहे हैं। व्यक्ति ने दुखी मन से लिया हुआ शेष एक मास्क भी वापस करते हुए कहा-लो, अपना यह मास्क भी ले लो। मुझे जरूरत नहीं। मैं तो मुंह पर साफ कपड़ा ही ढक लूंगा। इसकी जरूरत जिसे हो दे दो।
मास्क बांटने वालों ने लपककर मास्क व्यक्ति से लिया और बुड़बुड़ाए कि यह मास्क किसी ओर को देंगे। खड़ी भीड़ तमाशा देख रही थी कि जिस व्यक्ति से दो मास्क देकर दोनों छीन लिए उससे रहा न गया और कहा-भाइयों, तुम तो महज मास्क बांटने का दिखावा कर रहे हो ताकि तुम्हारा समाचार छप जाए और तुम प्रसिद्धि पा सको। अच्छा हो एक ही मास्क ले आते और सभी को एक बार देकर वापस ले लेते। तुम्हारा नाम भी होता और लोग मास्क को देखकर मन भर लेते। इतना सुनकर मास्क बाटने वालों की आंखें खुुल गई। उन्होंने मास्क वापस व्यक्ति को देना चाहा किंतु वो अति जिद्दी था। उसने कहा-हर किसी का स्वाभिमान होता है। स्वाभिमान पर ठेस करना उचित नहीं है। तुम तो दिखावा करने वाले लगते हो। इतना कहकर व्यक्ति आगे बढ़ गया। भीड़ उस व्यक्ति को एकटक देखती रही।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
जन्म
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नौ माह गर्भ में पड़ा रहा
सहने पड़े थे कितने कष्ट
इंतजार रहा जग देख लूं
इच्छा से हुए थे दर्द नष्ट,
मां को पेट में मारी लात
प्रसन्न हो मां दे रही साथ
मां की ममता होती अमर
मां -ममता की क्या बात,
कभी ना वो खाया मां ने
जिसका हो मुझे नुकसान
मां की वेदना मां ही जाने
यूं है मां की निराली शान,
आखिरकार जन्म पाया मैं
आया इस स्वार्थभरे संसार
मां की ममता कम ना हुई
मिलता रहा स्वर्ग सा प्यार,
जन्म देकर मां धन्य हुई है
अब मैं मां का हूं आभारी
ऋण कभी नहीं चुका पाऊं
ये ऋण सदा रहेगा उधारी।
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घुड़मचगाड़ी
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ग्राम्य जीवन सुंदर था
चला करती बैलगाड़ी
बैलों से हल चलते थे
सवारी में घुड़मचगाड़ी,
जनहितैषी प्यारी भाषा
सहयोग पूर्ण रवैया था
टीवी,फोन नहीं होते थे
गांव-गांव में गवैया था,
हट्टे कट्टे गबरू होते
घी,दूध, दही का खाना
रोटी सिर रख ले जाती
शाम ढले लौटके आना,
घी,शक्कर हाली खाते थे
मेहनत करते थे दिनरात
पूरा परिवार करे लावणी
बटाते एक दूजे का हाथ,
लुप्तप्राय हुई है बैलगाड़ी
निभाती थी किसान साथ
लौटकर आएगा फिर युग
यादव कहता सुन लो बात।
**होशियार सिंह,कनीना,हरियाणा**




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