Thursday, April 02, 2020

सख्ती 
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डंडे से भागता भूत
कहावत  अपनाओ
सख्ती से  काम लो
कोरोना को भगाओ,
सड़कों पर चल रहे
लेकर  कोई बहाना
कोरोना यूं तो बढ़ेगा
शायद इन्हें ना माना,
कफ्र्यू सम हालात में
ये लोग  मान जाएंगे
नहीं  अगर  माने तो
कोरोना को  बढ़ाएंगे,
सरपंच बरते  सख्ती
सख्त हो जा सरकार
नहीं रुकेगा  कोरोना
तब ही  मानेगा हार।
**होशियार सिंह,लेखक,कनीना,हरियाणा**

लघुकथा            आइना 

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राम बीच बाजार में सड़क पर श्याम से बात कर रहा था कि तभी उनकी नजर एक बड़े कुत्ते पर पड़ी जो बंदरों की ओर बढ़ रहा था जो खाना खा रहे थे। बंदरों की संख्या ये ही कोई 10-12 थी। ताकतवर कुत्ते ने बंदरों के बीच से उनका खाना छीनना चाहा तो राम और श्याम बातें करनी भूल गए और एकाएक बंदरों एवं कुत्ते की ओर देखने लगे। बंदरों ने शोर मचाया और कुत्ते की ओर झपटे किंतु कुत्ते ने अपना जोश दिखाते हुए बंदरों की ओर तीखे तेवर दिखाकर उनके बीच से उनके पास ही रोटी खाने लगा। आराम से रोटी खाकर आगे बढ़ गया। बंदर देखते रह गए। राम ने श्याम से कहा-वाह! यह तो सचमुच समाज का आइना था। एक ताकतवर जन समाज के दस लोगों का खाना हजम कर जाता है किंतु ये लोग कुछ भी नहीं बोल पाते हैं। दोनों ने दृश्य पर ठहाका लगाया और अपने अपने गंतव्य स्थानों की ओर बढ़ गए।
**होशियार सिंह, कनीना, हरियाणा**


ताऊ ताई संवाद 

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ताई बोली ताऊ से........
घर में रहकर बोर हुए हैं
कोरोना ने बहुत सताया है
घर की  दीवारें खाने दौड़े
बहुत बुरा  समय आया है।
ताऊ बोला ताई से...........
लॉकडाउन कम हो गया था
तब्लीगों ने बुरा  काम किया
न जाने कब किसे लग जाए
ऐसा विषाणु उन्हें छोड़ दिया,
जब तक वायरस कम न हो
तब तक यूं ही रहें यहां कैद
भगवान हमारी सलामती रहे
वरना हम बुलाएंगे कोई वैद्य।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

कोरोना 

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अच्छा खाना रोज खाकर
कुछ का मन  बदल रहा
लॉकडाउन यूं चलता रहे
वरना ये खाना और कहां,
बारात से चलकर आते हैं
खाकर कमी बता जाते है
जरूरत पड़ती  अगर हमें
बच्चों का परोसा लाते  है,
खाना बनाना पड़ता घर में
परंतु यहां मुफ्त में मिलता
खाकर पूड़ी,सब्जी,चावल
मन गुलाब  जैसा खिलता,
कोई रोक टोक नहीं होती
बेशक आ जाए जन हजार
खाना, रहना यहां मुफ्त है
खूब सेवा और मिले प्यार।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


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