योद्धा
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कोरोना से लड़े लड़ाई
जान को लगाते बाजी
पूरा सम्मान मिल रहा
राज जनता खूब राजी,
एक वक्त आएगा जब
इनके गुण लोग गाएंगे
ऊंचा सम्मान मिलेगा
सारे योद्धा ढूंढे जाएंगे,
सीमा पर पहरा दे रहे
उनकी भांति ये योद्धा
चप्पे चप्पे सेवा करते
कहलाते धरती पुरोधा,
नाम कमाना है अगर
कर लो देश की सेवा
नाम अमर हो जाएगा
मिलेगी एक दिन मेवा,
हर वीर सीमा पर हो
गांवों में कोरोना योद्धा
देश के काम ना आए
वो धरती पर है बोझा।
भगवान/ईश्वर
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दुख भंजन नाम तुम्हारा
सुना ले एक अर्ज हमारी
दिल में हमारे बस जाना
लगे तुम्हारी सूरत प्यारी,
जंगल, वन, पहाड़ में तू
तुमसा न कोई बलशाली
हर दुख और सुख में तू
करता जग की रखवाली,
कभी कभी तो लगे ऐसा
आस पास कहीं रहते हो
कभी सुख के आंसू बनते
कभी तन पे दर्द सहते हो,
आना कभी मन मंदिर में
बस ये अरदास हमारी है
कभी तो दर्शन दे दो ईश्वर
ये दर्शन प्यास तुम्हारी है।
जय जवान-जय किसान
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बार-बार नभ को तकता
घनघोर घटा कब आएगी
रिमझिम रिमझिम बारिश
कब आकर मन हर्षाएगी,
दो बैलों की जोड़़ी पाकर
सुबह हल चलाने आऊं
रूखी सूखी बासी भोजन
खाकर निज प्राण बचाऊं,
जब खेती अच्छी होती है
कर्जा साहूकार उतर जाए
मौसम की अगर मार पड़े
दिन डूबे, कर्जा बढ़ जाए,
टूटी चप्पल फटेहाल तन
भूख में परिवार अकुलाए,ु
इतने बुरे दिन देकर दाता
तेरा कलेजा ना फट जाए,
सौ गज जमीन का टूकड़ा
उबड़ खाबड़ कहलाती है
दिनभर खेत में काम करूं
वो तन पे पसीना लाती है,
हर वर्ष अनाज खत्म होए
झोली फैलाता अनाज की
बस दो जून की रोटी मिले
नहीं इच्छा तख्त ताज की,
प्रभु मेरी ये लाज बचाओ
अच्छी सी पैदावार दे देना
पांच रुपये का प्रसाद बांटू
छोटी एक अर्ज सुन लेना,
सबसे बुरे दिन बीते कृषक
धरती पुत्र जगत में कहाए
कितना दुष्कर जीवन होता
कोई सुनने सामने ना आए।
*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
गंगा/प्रवाह/नदियां
विधा-कविता
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सलिल पावनी गंगा जी
धरती पर जब से आई
कितने पापी उतार दिए
लाखों जन महिमा गाई,
नदियों में सबसे पवित्र
भागीरथ इसे लाया था
सगर के पुत्र पौत्रों को
भव से पार लगाया था,
प्रवाह तेज पाताल धंसे
समस्या बनी विकराल
शिवभोले ने वेग रोका
उलझाया अपने बाल,
जाहनम ऋषि ने पीकर
धरा पर इसे उतारा था
असुरों का उद्धार किया
देवों का बस सहारा था,
मां का दर्जा दिया हुआ
देती है धन, अन्न, जल
सदियों से बहता आया
जल करता है कलकल।
*होशियार सिंह यादव
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कोरोना से लड़े लड़ाई
जान को लगाते बाजी
पूरा सम्मान मिल रहा
राज जनता खूब राजी,
एक वक्त आएगा जब
इनके गुण लोग गाएंगे
ऊंचा सम्मान मिलेगा
सारे योद्धा ढूंढे जाएंगे,
सीमा पर पहरा दे रहे
उनकी भांति ये योद्धा
चप्पे चप्पे सेवा करते
कहलाते धरती पुरोधा,
नाम कमाना है अगर
कर लो देश की सेवा
नाम अमर हो जाएगा
मिलेगी एक दिन मेवा,
हर वीर सीमा पर हो
गांवों में कोरोना योद्धा
देश के काम ना आए
वो धरती पर है बोझा।
भगवान/ईश्वर
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दुख भंजन नाम तुम्हारा
सुना ले एक अर्ज हमारी
दिल में हमारे बस जाना
लगे तुम्हारी सूरत प्यारी,
जंगल, वन, पहाड़ में तू
तुमसा न कोई बलशाली
हर दुख और सुख में तू
करता जग की रखवाली,
कभी कभी तो लगे ऐसा
आस पास कहीं रहते हो
कभी सुख के आंसू बनते
कभी तन पे दर्द सहते हो,
आना कभी मन मंदिर में
बस ये अरदास हमारी है
कभी तो दर्शन दे दो ईश्वर
ये दर्शन प्यास तुम्हारी है।
जय जवान-जय किसान
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बार-बार नभ को तकता
घनघोर घटा कब आएगी
रिमझिम रिमझिम बारिश
कब आकर मन हर्षाएगी,
दो बैलों की जोड़़ी पाकर
सुबह हल चलाने आऊं
रूखी सूखी बासी भोजन
खाकर निज प्राण बचाऊं,
जब खेती अच्छी होती है
कर्जा साहूकार उतर जाए
मौसम की अगर मार पड़े
दिन डूबे, कर्जा बढ़ जाए,
टूटी चप्पल फटेहाल तन
भूख में परिवार अकुलाए,ु
इतने बुरे दिन देकर दाता
तेरा कलेजा ना फट जाए,
सौ गज जमीन का टूकड़ा
उबड़ खाबड़ कहलाती है
दिनभर खेत में काम करूं
वो तन पे पसीना लाती है,
हर वर्ष अनाज खत्म होए
झोली फैलाता अनाज की
बस दो जून की रोटी मिले
नहीं इच्छा तख्त ताज की,
प्रभु मेरी ये लाज बचाओ
अच्छी सी पैदावार दे देना
पांच रुपये का प्रसाद बांटू
छोटी एक अर्ज सुन लेना,
सबसे बुरे दिन बीते कृषक
धरती पुत्र जगत में कहाए
कितना दुष्कर जीवन होता
कोई सुनने सामने ना आए।
*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
गंगा/प्रवाह/नदियां
विधा-कविता
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सलिल पावनी गंगा जी
धरती पर जब से आई
कितने पापी उतार दिए
लाखों जन महिमा गाई,
नदियों में सबसे पवित्र
भागीरथ इसे लाया था
सगर के पुत्र पौत्रों को
भव से पार लगाया था,
प्रवाह तेज पाताल धंसे
समस्या बनी विकराल
शिवभोले ने वेग रोका
उलझाया अपने बाल,
जाहनम ऋषि ने पीकर
धरा पर इसे उतारा था
असुरों का उद्धार किया
देवों का बस सहारा था,
मां का दर्जा दिया हुआ
देती है धन, अन्न, जल
सदियों से बहता आया
जल करता है कलकल।
*होशियार सिंह यादव
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