ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से....
बहुत दिन बीत गए है
पानी के बतासा खाएंगे
दो चार समोसा लाकर
खूब मजे से हम खाएंगे।
ताऊ बोला ताई से.......
कल हम बतासे बनाएंगे
और बनाएंगे हम समोसा
बेहतर समोसे बना लोगी
मुझे आज तुम यह भरोसा,
तेल, मैदा, आलू व सब्जी
और रखे हैं टमाटर अचार
कुछ मीठा सोडा डाल लेंगे
खाकर बनेंगे शुद्ध विचार।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
चोर के घर मोर
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दो नकली पत्रकार एक अधिकारी के पास जाकर रोब झाडऩे लगे कि उनकी खबर छाप देंगे। वो सरसों खरीद में घोटाला कर रहा है। खुद भी खाता है और अधिकारियों को भी खिलाता है। अधिकारी के अंदर खोट था। वो डर गया और मारे डर के उन्हें 20 हजार रुपये देने स्वीकार कर लिए। फिर तो वो नकली पत्रकार हर किसी को धोंस दिखाने लगे। एक सज्जन ने सारी बात सुनी और उसके मुख से निकला-वाह, अधिकारी भी बेईमान है और नकली पत्रकार भी। इसे कहते हैं चोर के घर मोर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
जोश
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खूब कोरोना ने बिगाड़ा
नहीं हुआ ये कम जोश
कोरोना मौका है जाओ
वरना कर देंगे खामोश,
कितनी जान तूने ली हैं
कर देंगे हिसाब चूकता
ऐसे देश से आया है तू
उनका है जहाज डूबता,
महामारी तूने फैलाई है
तुझे शर्म नहीं आई है
समेट ले अब तो दुकान
वरना तेरी कर देंगे शाम,
जग बेशक हार जाएगा
पर जीत होगी भारत की
तू मिट्टी में मिल जाएगा
नींव कच्ची है इमारत की।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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ताई बोली ताऊ से....
बहुत दिन बीत गए है
पानी के बतासा खाएंगे
दो चार समोसा लाकर
खूब मजे से हम खाएंगे।
ताऊ बोला ताई से.......
कल हम बतासे बनाएंगे
और बनाएंगे हम समोसा
बेहतर समोसे बना लोगी
मुझे आज तुम यह भरोसा,
तेल, मैदा, आलू व सब्जी
और रखे हैं टमाटर अचार
कुछ मीठा सोडा डाल लेंगे
खाकर बनेंगे शुद्ध विचार।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
चोर के घर मोर
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दो नकली पत्रकार एक अधिकारी के पास जाकर रोब झाडऩे लगे कि उनकी खबर छाप देंगे। वो सरसों खरीद में घोटाला कर रहा है। खुद भी खाता है और अधिकारियों को भी खिलाता है। अधिकारी के अंदर खोट था। वो डर गया और मारे डर के उन्हें 20 हजार रुपये देने स्वीकार कर लिए। फिर तो वो नकली पत्रकार हर किसी को धोंस दिखाने लगे। एक सज्जन ने सारी बात सुनी और उसके मुख से निकला-वाह, अधिकारी भी बेईमान है और नकली पत्रकार भी। इसे कहते हैं चोर के घर मोर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
जोश
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खूब कोरोना ने बिगाड़ा
नहीं हुआ ये कम जोश
कोरोना मौका है जाओ
वरना कर देंगे खामोश,
कितनी जान तूने ली हैं
कर देंगे हिसाब चूकता
ऐसे देश से आया है तू
उनका है जहाज डूबता,
महामारी तूने फैलाई है
तुझे शर्म नहीं आई है
समेट ले अब तो दुकान
वरना तेरी कर देंगे शाम,
जग बेशक हार जाएगा
पर जीत होगी भारत की
तू मिट्टी में मिल जाएगा
नींव कच्ची है इमारत की।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**






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